मंगलवार, 26 अगस्त 2014

राजागुरू बालकदास जयन्ती- 18 अगस्त 2014 (सतनाम संकल्प दिवस)


                  अत्यंत हर्ष के साथ समस्त संत समाज को अवगत कराया जा रहा है कि इस वर्ष १८-०८-२०१४ को राजा गुरू बालकदास साहेब जी के जन्म दिवस के उपलक्ष्य में गुरू घासीदास बाबा जी के तपोभूमि गिरौदपुरी धाम में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ, समस्त गुरू वंशज धर्म मंच पर विराजमान होकर सभी संत समाज को दर्शन दिये और अमृत वचनो से संबोधित किये। इस शुभ अवसर पर समाज के लोगो में उमंग देखते ही बन रहा था चारो तरफ सतनाम का जयघोष सुनाई पड़ रही थी साथ में उपस्थित सतनाम सेना के सिपाही अखाड़ा का भी प्रदर्शन कर रहे थे। गुरू वंशजो को एक मंच में देखने से ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो जैसा स्वर्ग में विराजमान देव शोभा पाते हैं वैसा ही शोभा गिरौदपुरी धाम में गुरू वंशज पा रहे हैं।


                 समस्त गुरूजनो ने एक साथ मंदिर में स्थापित गुरू गद्दी में शीश झुकाये और परमपूज्य गुरू घासीदास बाबा जी से प्रार्थना किये कि समस्त संत समाज के उपर कृपा बनाये रखिये और जो भी विपत्ती आज तक समाज में आयी रही होगी उसे दुर करके समस्त मानव जगत को सुखमय और प्रसन्नता से जीवन जीने का आशिष प्रदान किजीये।


                   गुरू बालकदास जयंती के कार्यक्रम में सम्मिलित समस्त संत समाज भाव विभोर होकर गुरू वंशजो का आभार प्रकट कर रहे थे उनके चेहरो में जो खुशी झलक रही थी उसको शब्दो में नही लिखा जा सकता । गुरू वंशज भी संत समाज के भावनाओ को देखते हुये आगे सभी तरह के कार्यो में एकमत होकर समाज को दिशा देने हेतु संकल्प लिये। 

                  गुरू वंशजो का दर्शन पाकर समस्त संत समाज अपने भाग्य का सराहना कर रहे थे, साथियों अब हम समस्त संत समाज का जिम्मेदारी बन जाता है कि गुरू जनो के मार्गदर्शन में काम करें और छत्तीसगढ़ ही नही बल्कि पुरे देश में सतनाम धर्म की पुर्नस्थापना हेतु दृढ़ संकल्प लेकर एकजुटता और एकरूपता के साथ समाज को आगे बढ़ाने हेतु प्रयास करें। हम धन्य है जो ऐसे समाज में जन्म लिये जहाँ गुरू घासीदास बाबा जी के वंशज हमें सभी क्षेत्रो में मार्गदर्शन देने हेतु सक्षम हैं। चाहे वह अध्यात्म के क्षेत्र में हो, या राजनिती के क्षेत्र में हो, या धर्म के क्षेत्र में हो या सामाजिकता के क्षेत्र में हो । यह तो सर्व विदित है बिना मुखिया के कोई भी काज सफल नही हो पाता और हम सौभाग्यशाली हैं जिनका मुखिया गुरू घासीदास बाबा जी के वंशज हैं ।

               साथियों आज तक जो भी परिस्थिती रही हो उन सभी को भूलाकर, एकमत होकर, समाज को सभी क्षेत्रो में आगे बढ़ाने हेतु मिलजुल कर कार्य करें । अब वह दिन दुर नही जब देश के कोने कोने में सतनाम का नाम गुंजायमान होगा, क्योकि "मानव-मानव एक समान" के मूल मंत्र को लेकर हमें समस्त मानव जगत को सतनाम का संदेश देना है और सतनाम धर्म की ख्याति और सम्मान को पुर्नस्थापित करना है। हमारे समाज में छोटे बड़े अनेको सामाजिक संगठन हैं और सभी अपने अपने स्तर पर समाजहित में कार्य कर रहे हैं और आगे भी करते ही रहेंगे, लेकिन अब उन सभी संगठनो का एक ही मकसद होना चाहिये......समाज का सभी क्षेत्रो में समग्र विकास....और इसको प्राप्त करने हेतु सभी संगठनो को गुरू वंशजो से समय समय पर राय लेना होगा और अपने अपने कार्य का लेखा जोखा गुरू वंशजो को देना होगा....ताकि गुरू वंशज उचित और प्रभावकारी रणनिती बनाकर शासन प्रशासन तक समाज के बात को रख सके। तो आइये साथियो इस गुरू प्रधान सतनामी समाज को गौरवशाली स्थान तक ले जाने हेतु एकमत होकर कार्य करें और गुरू घासीदास बाबाजी, गुरू अमरदास बाबाजी, एवं राजा गुरू बालकदास जी के सपने को साकार करें तभी हमें सतनामी कहलाने का हक होगा ।

               उक्त के संबंध में मुझ निवेदनकर्ता आचार्य हुलेश्वर जोशी का निवेदन है कि हम भविष्य में प्रत्यके वर्ष कृष्ण जन्माष्ठमी के दिन को सतनाम संकल्प दिवस एवं राजागुरू बालकदास जयंति के रूप में मनाते हुए सतनाम धर्म को विश्वकिर्तिमान दिलाने के लिए अपने मन, कर्म और वचन को परमपुज्यनीय गुरू घासीदासजी, राजागुरू बालकदासजी और गुरूवंशजों के गुरूओं के बताये मार्ग और वचन के अनुरूप करें l

लेखक- श्री विष्णु बन्जारे सतनामी
       
सतनाम धर्म की ओर से जनहित में प्रसारित

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