बुधवार, 8 अक्तूबर 2014

सतनामी संत नैनदास सतनामी जल समाधी में 24 घण्टे

सतनामी संत नैनदास सतनामी जल समाधी में 24 घण्टे 



आज हमारे समाज के कुछ लोग ज्ञान प्राप्ति के लिये ...दुसरे समाज के लोगो के पास जाते हैं, दुसरे धर्म के लोगो के पास जाते हैं, यहां तक उनके लिये घर परिवार को छोड़कर १५-१५ दिनो के लिये दुसरे शहर तक चले जाते हैं......यह देखकर की वहां रहने और खाने का उचित प्रबंध के साथ ज्ञान की बातें बताई जाति है...?कोई नागपुर जा रहा है, कोई ब्यास जा रहा है, कोई हरिद्वार काशी जा रहा है.....लेकिन अपने समाज के गुरूधाम, अपने समाज के संत जिन्होने आत्म तत्व, आत्म ज्ञान की प्राप्ति बिना किसी दिखावे के कर चुके हैं.....उनसे मिलने और उनसे ज्ञान लेने कभी नही जाते.....आखिर क्यो...?क्योकि वे या तो गरीब हैं या फिर कम पढ़े लिखे हैं, जिनसे मिलने में ये लोग अपना अपमान समझते है......?क्यो ऐसे लोग अपने गुरूजी के ज्ञान और उनके आलौकिक शक्ति पर विश्वास नही करते ? और विश्वास उनपर करते हैं जिनका हमारे समाज, हमारे भूमि से कोई लेना देना नही है..? और नही ज्ञान में हमारे संत जनो के बराबरी करते हैं !


यह तो एक साधारण संत जो गुरू बाबाजी के भक्त है उसका महिमा है सोचो गुरू बाबाजी में कितना शक्ति रहा होगा, तभी तो छ: महिने के मृत माता सफुरा को जिवीत कर दिखाये.....! 
सतनाम एक नाम है, बिरले कोई जानन हार । 
जे जानै सो भंव तरे, भंव सागर से पार ।।
Yah pal aitihasik raha h... Jab samadhi ke liye gadda khoda gya vaha 7 fit ke bad pani aane laga aur gadda 4 fit tak bhar gya ... Ye thal samadhi jal samadhi me badal gya .... Aur Sant Naindas ji ke upar baba ji ke asim kripa h .. Jiske karan pani ke bhitar jaha aam insan 5 minute tak jivit nahi rah sakta vaha sant Naindas ji 24 ghante tak satnam samadhi me rahe ... Aur surkshit samadhi se bahar aaye ... Aisa samadhi sayad pahli bar huya hoga Jo thal samadhi se jal samadhi me badal gya hoga ....

साहेब सतनाम
आश्चर्य चकित कर देने वाली बात !!

भंडारपुरी धाम गुरू दर्शन मेला में सतनाम के अलख जगाने के लिये सभी गुरूजनो के सेवक संत श्री नैनदास सतनामी जी ने 24 घंटे जल समाधी लगाकर गुरू बाबाजी के नाम के शक्ति और सतनाम के महिमा को समाज के बीच प्रमाण सहित दिखला दिये हैं जिसे समाज कभी भी नही भूल सकता । आम जन उस समाधी में ४ घंटे तक जीवित नही रह सकता था, जबकि संतजी ने २४ घंटे समाधी लेकर सतनामी समाज को सतनाम का मरम समझा दिये, जिसे आम जन मानस आंखो से देखकर तनिक भी शंका नही कर सकते।
नोट:- अपने आंखो से देखे हुये भाई नरेन्द्र चेलक के जुबानी....संत नैनदास सतनामी जी के बारे में...

मानव जीवन का वास्तविक सिद्धांत क्या है ?

मानव जीवन का वास्तविक सिद्धांत क्या है ? "मनखे-मनखे एक समान" से परिचित हुए बिना कोई भी मानव पूर्णतः मानव नही हो सकता।...