बुधवार, 22 अक्तूबर 2014

सतनाम आरती

सतनाम आरती
(सतनाम धर्म के अनुयायियों द्वारा गाये जाने वाले)




ऐसे आरती देहव हो लखाई
निरखत जोत अधर फहराई

पहले आरती जगमग जोति,
हीरा पदारथ बारे मोती हो l       आरती……..

सोन कर थारी, कपूर लागे बाती,
भंव-भंव आरती उतारे बहूं भाती हो l   आरती……..

तीजे आरती त्रिभूवन मोहे,   
रतन सिहांसन गुरूजी सोहे हो l     आरती……..

चौथे आरती चारो जग पूजा,
आप सही देव और नही दूजा हो l      आरती……..

पांचे आरती जो नर गावे,
चढ के विमान अमरलोक सिधावे हो l   आरती……..

: आरती : दर्शन के गावे,
लख चौरासी के बंधना छूडावे हो l      आरती……..

साते आरती सतनामी घर आये,
हंसा उबार अमरलोक पहुंचावे हो l   आरती……..x

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मानव जीवन का वास्तविक सिद्धांत क्या है ? "मनखे-मनखे एक समान" से परिचित हुए बिना कोई भी मानव पूर्णतः मानव नही हो सकता।...