सतनामी, सतनाम धर्म के अनुयायी है न कि हिन्दू का


सतनामी, सतनाम धर्म के 

अनुयायी है न कि हिन्दू का



१. छत्तीसगढ़ के किसी भी गाँव में हिन्दु लोगो द्वारा, हिन्दु पारा में सतनामी पारा को सम्मिलित नही किया जाता जबकि सतनामी के अलावा अन्य सभी अनुसूचित जातियों, जनजातियो, अन्य पिछड़ा वर्ग और सामान्य वर्ग को हिन्दु पारा कहा जाता है !

२. छत्तीसगढ़ में कोई भी हिन्दु, सतनामी को, हिन्दु नही मानता है उसी प्रकार सतनामी भी अपने आपको हिन्दु नही मानता है !

३. छत्तीसगढ़ के गाँवो में निवास करने वाले समुदायों को बताने हेतु सतनामी पारा और हिन्दु पारा शब्दो का उपयोग किया जाता है! यदि सतनाम जाति होती तो उसकी तुलना हिन्दु से नही की जाति। वे लोग अन्य जाति को हिन्दु पारा में सामिल कर लेते हैं केवल सतनामी को छोड़ देते हैं !
४. हिन्दु किसी के अभिवादन में भूलकर भी "सतनाम ग" नही कहता यदि कोई सतनामी उसे सतनाम ग कहकर अभिवादन करता है तो हिन्दु कभी भी सतनाम ग नही कहता बल्कि राम रामग कहकर अभिवादन का जवाब देता है!
५. सतनाम धर्म के वृहद प्रचार में हिन्दु संप्रदाय के अनुयायी जैसे तेली, कुम्हार, यादव, नाई, धोबी, लुहार, मोची, केंवट, ढ़ीमर, मेहर आदि जाति के लोग सतनामी हुये । अगर सतनामी हिन्दु संप्रदाय का एक पंथ होता या हिन्दु संप्रदाय का एक अछूत शुद्र होता तो उपर बताये गये हिन्दु जाति के लोग सतनामी बनकर अछूत हिन्दु कभी नही बनते और ये लोग अपने जाति का त्याग कभी नही करते और नही सतनामी से कभी वैवाहिक संबंध जोड़ते।
तेलासी ग्राम इस बात का साक्षात प्रमाण है कि हिन्दु संप्रदाय के शुद्र लोग सतनाम धर्म ग्रहण करके सतनामी बने।
६. हिन्दु संप्रदाय में अगर अन्य संप्रदाय का ब्यक्ति सामिल होना चाहता है तो हिन्दु धर्म उसे किस जाति में स्थापित करेगा ? उसे हिन्दु धर्म का कोई भी जाति अपने जाति में नही मिला सकता ।
जबकि सतनाम धर्म में विभिन्न जाति के लोग सम्मिलित हुये और एक सतनामी हो गये...मतलब ..मानव मानव अक समान....इन सभी तथ्यो से "सतनाम धर्म" का होना प्रमाणित होता है, जैसे ईसाई धर्म और मुस्लिम धर्म में कोई ब्यक्ति सामिल हो जाता है वैसे ही सतनाम धर्म में भी कोई भी ब्यक्ति सामिल हो सकता है ।
७. लोग किसी जाति को ग्रहण नही करते....धर्म को ग्रहण करते हैं.....इससे भी साबित होती है कि.....सतनाम धर्म ...को ग्रहण करके....विभिन्न जाति के लोग ...सतनामी बने...मतलब सतनाम धर्म में मानव-मानव एक समान है यहां सबको सिर्फ एक जाति मिलती है...वह है...सतनामी....!


पूर्व में जिस तरह सतनाम धर्म के अनुयायीयों को तोड़कर .....रामनामी, सुर्यवंशी आदि बना दिया गया उसी तरह आज के समय में सतनामीयों को तोड़कर बौद्ध, क्रिश्चन आदि बनाया जा रहा है.......समाज के जागरुक सतनामी संतो से निवेदन है कि गुरू बाबाजी एवं राजा गुरू बालकदास जी के समाज को तोड़ने वालो को.....समाज के दुश्मनो को......उचित सबक सिखाये और उनके घृणित मनसुबे को समाज के सामने उजागर करें...!

जब तक कानूनी रुप से सतनाम धर्म को मान्यता नही मिल जाति तब तक कानूनी मजबुरी के कारण अपना धर्म हिन्दु ही लिखे और सालिनता पूर्वक सतनाम धर्म को कानूनी मान्यता प्रदान करने हेतु समाज में जागरुकता पैदा करें, यकिन मानिये हम एकजुट होकर सतनाम धर्म को कानूनी मान्यता दिला पाने में अवश्य ही सफल होंगे ।

आदि धर्म सतनाम है, आदि नाम सतनाम ।
सतनाम के जपइया को, तुम सतनामी जान ।।
साहेब सतनाम


उपरोक्त सभी तथ्यों से सिद्ध होता है कि विश्व का एक मात्र "मानव धर्म" सतनाम धर्म ही है !

लेखक: सतनामी सुपु्त्र श्री विष्णु बन्जारे सतनामी

सतनामी एवं सतनाम धर्म विकास परिषद द्वारा जनहित में प्रसारित