"मैं सतनामी अलबेला हूँ "

"मैं सतनामी अलबेला हूँ "


मै सतनामी अलबेला हूँ ,
राजा गुरु जी का चेला हूँ !२!
हमें खूब दबाया उसने ,
अब चलती तलवार का रेला हूँ !
मै सतनामी अलबेला हूँ ,
राजा गुरु जी का चेला हूँ !२!

सही खूब त्रासदी उसने ,
जिसने ही हमको जन्म दिया !
दुश्मनों ने हमारे पूर्वजों के ,
जाने सर कितने कलम किया !२!
वही याद दिलाता हमको,
उन दुष्टों के लिये झमेला हूँ !
मै सतनामी अलबेला हूँ ,
राजा गुरु जी का चेला हूँ !२!
जिस राह में पड़े हो कांटे ,
उस राह से उसे हटाना है !
गुरु राजा के राह पे चलके ,
सतनामी के सर को उठाना है !२!
इस बात को ठान लिया हूँ ,
अब मै भी नही अकेला हूँ !
मै सतनामी अलबेला हूँ ,
राजा गुरु जी का चेला हूँ !२!
जो हमसे टकरायेगा ,
वो चूर चूर हो जाएगा !
जो साथ हमारे आएगा ,
वो सतनामी कहलायेगा !२!
आंधी तूफ़ान के पानी में ,
घुलने वाला नही ढेला हूँ !
मै सतनामी अलबेला हूँ ,
राजा गुरु जी का चेला हूँ !२!
कवि श्री मंगल चातुरे