सतनाम धर्म के संबंध में कटु सत्य

जो ब्यक्ति गुरू गद्दी, चौका पूजा, जैतखाम का विरोध करता है वह परम् पूज्य बाबा गुरू घासीदास जी, कबीरदास जी, गुरू नानकदेव जी आदि का विरोध करता है, क्योकि इन गुरू जनो ने आत्मा-परमात्मा और दुनियाँ के रचना करने वाला सतपुरूष पिता सतनाम् का गुण गाया है । जिनका प्रमाण स्पष्ट रूप से उनके वाणियों में मिलता है जो हमारे लिये बिना शंका के स्वीकार्य है । इन सबके बारे में विरोध करने वालो को सतनामी समाज किसी भी किमत में स्वीकार नही कर सकता । हमें उनके कुटिलनिती से समाज को बचाना होगा। सतनामी समाज के लोगो ने देखा है जो गुरू गद्दी, जैतखाम, चौका पूजा आदि का विरोध करने वाले होते हैं वह सतनामी समाज और गुरू जी के सच्चे अनुयायी नही होते सिर्फ अपने आपको सतनामी के समकक्ष दिखाने कि लिये, और सतनामीयों के बीच में रहकर सतनामी समाज से होने वाला लाभ को उठाने वाला होता है, जो अपनी बात को रखने के लिये सतनामी शब्द का सहारा लेता है ताकि लोगो को लगे कि वह सतनामी है और अपने जानकारी को समाज के सामने रख रहा है। परन्तु भोले भाले लोग उस चतुर ब्यक्ति के असल मकसद को नही समझ पाते और उनके जाल में फस जाते हैं । पहले तो वह चतुर ब्यक्ति चिकनी-चुपड़ी बात करके भोले-भाले जनता को मिठी-मिठी बातो का सहारा लेकर, उनके मजबुरियो का एहसास दिलाते हुये, उनके दिल को जितने का प्रयास करता है । िफर धिरे-धिरे अपने असली मकसद की बात को उनके बीच रखना शुरू कर देता है । जैतखाम, गुरू गद्दी, चौका पूजा आदि जो हम सतनामीयों के आन-बान-शान और हमारी गौरव गाथा का जीता-जागता प्रमाण है (अगर ये सभी नही तो सतनामी समाज का कोई अस्तित्व ही नही), उसे नही मानने का बात करना शुरू कर देता है। ढ़ोगी पन, आडम्बर, ब्राम्हण वाद, मनुवाद, आदि के उदाहरण देकर अपनी बात को हमारे सामने इस तरह से रखता है कि हमारे भोले भाले सतनामी भाई उनके हाँ में हाँ मिलाने लग जाते हैं ।आप सभी साथी स्वयं विचार करके देखिये क्या आज इसी तरह की बाते हमारे भोले भाले सतनामी भाइयों को नही बताया जा रहा है ?दरअसल में वे लोग जो बात कहते हैं, या बताते हैं वह वैसा नही है जैसा वे बताना चाहते हैं, उनका मुख्य मकसद अपनी प्रमाणिकता साबित करने का होता है । आप लोगो ने देखा होगा गुरू गद्दी, जैतखाम, चौका पूजा का विरोध वही लोग ज्यादातर करते हैं जो सतनामी नही होता बल्कि सतनामी से अलग होकर किसी अन्य संप्रदाय को मानने वाला होता है। चूँकि उनके संप्रदाय में जैतखाम, गुरू गद्दी, चौका पूजा आदि को तो माना ही नही जाता तो उसी को प्रमाणित करने के उद्देश्य से जैतखाम, गुरू गद्दी, चौका पूजा का विरोध करते हैं । और यह बताने का प्रयास करते हैं कि वही लोग सच्चे में गुरू घासीदास जी के अनुयायी हैं । अपने किये गलत करम को सही बताने का असफल प्रयास करते हैं, उन्हे पता होना चाहिये कि जो गुरू जी के अनुयायी हैं वह सब गुरू जी के समय काल से लेकर आज तक उनके बताये गुरू गद्दी, जैतखाम, चौका पूजा का पुरे तन-मन-धन से पालन करते आ रहे हैं ।आप स्वयं सोचिये इन सबकी (जैतखाम, गुरू गद्दी, चौका पूजा) प्रमाणिकता नही होती तो क्या भंडारपुरी, तेलासीधाम आदि पवित्र स्थानो में इनकी स्थापना गुरूजी के समयकाल मे हुआ रहता, क्या गुरूजी के अनुयायी, सतनामी, गुरूजी के समय काल से आज तक उन सभी का दिलो जान से पालन करते आते । साथीयों दुनियाँ कुछ भी कहे हमें अपनी गौरव गाथा और गुरूजी के द्वारा प्रमाणित जैतखाम, गुरू गद्दी, चौका पूजा का पालन करते रहना है और गुरू जी के बताये रास्ते में चलकर अपने साथ-साथ अन्यो का भी जीवन सरल और सुखमय बनाने के लिये अनवरत कार्य करते रहना है और यही हमारे द्वारा गुरूजी को उनके बताये गये सतज्ञान के लिये सच्ची श्रद्धा से नमन करना होगा ।साथियों आईये हम सब प्रण करे कि, हम सतनामीयो के सच्ची पहचान जैतखाम, गुरू गद्दी, चौका पूजा के साथ सतनामीयों की सच्ची गौरव गाथा को किसी भी किमत में अपमानित नही होने देंगे और उन सभी प्रमाणित साक्ष्य को किसी भी किमत में उन लोगो के, जो हमारा अस्तित्व मिटाना चाहते हैं, के हाथो में नही जाने देगें । क्योकि छोड़ने कि देरी है, हमारा अस्तित्व को स्वीकार न करने वाले लोग कैसे हमारे अमुल्य धरोहरो को अपना बपौती बना लेगें किसी को कानो कान खबर तक नही होगी । इसलिये साथीयो आइये और अपना सतनामी होने का दायीत्व को निभाइये । सत का दीपक बुझने न देंगे यही अब हमने ठाना है घर घर में सतनामीयत िदखे काज ऐसा कर जाना है जो खुन दौड़ रहा शरीर में अब उसका कर्ज निभाना है उठो जागो और दौड़ो भाई सतनाम का अलख जगाना है ।

लेखक- श्री विष्णु बन्जारे सतनामी
       
सतनाम धर्म की ओर से जनहित में प्रसारित

सतनाम धर्मशाला गिरौदपुरी

सतनाम धर्मशाला गिरौदपुरी
सतनाम धर्मशाला गिरौदपुरी, यह धर्मशाला छत्तीसगढ़ प्रगतिशील सतनामी समाज द्वारा केवल समाजिक सहयोग से करीब 2.5 करोड़ की लागत से निर्मित है, जिसका उद्घाटन श्री भूपेश बघेल जी, माननीय मुख्यमंत्री द्वारा दिनांक 11.12.2019 को उद्घाटन किया गया है।