गुरू घासीदास जयंति कैसे मनाएं ?

गुरू घासीदास जयंति कैसे मनाएं ?

दूनिया का सबसे सर्वोच्च ज्ञान ’’मनखे-मनखे एक समान’’ का संदेश देने वाले परमपुज्यनीय गुरू घासीदास बाबा जी का जन्म 18 दिसम्बर सन् 1756 में ग्राम गिरौदपुरी, जिला रायपुर (वर्तमान जिला बलौदाबाजार) में हुआ था। उनके संदेशों एवं जनजागरूकता का ही परिणाम है कि आज मानव समुदाय यह स्वीकारने लगा है कि सभी मनुष्य एक समान हैं, कोई उच्च अथवा कोई नीच नही है, उनके जनआंदोलनों के प्रभाव से ही आज देश का बडा वर्ग शोषित होने से बच पाया है। गुरू घासीदास के जन्म के पूर्व मानव-मानव के बीच केवल असमानता, शोषण और अत्याचार जैसे ही संबंध थे।


गुरू घासीदास के जन्मदिवस को देशवासी गुरू घासीदास जयंति के रूप में बनाते हैं। हम संत समाज से आग्रह करते है कि संत समाज इस आयोजन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले। संतों ज्ञातव्य हो कि गुरू घासीदास की जयंती प्रत्येक वर्ष 18 दिसम्बर से प्रायः 31 दिसम्बर तक लगातार ही मनाया जाता है। कतिपय मामलों में इसके बाद भी लोग अपने आस्था के अनुरूप जयंति मनाते रहते है। इस संबंध में कुछ विशेष सुझाव मैं संत समाज शेयर करना चाहता हूँ:-

समाज द्वारा आयोजित जयंती कार्यक्रम में क्रमशः पदयात्रा, चैकपूजा, ध्वजारोहण, पंथी नृत्य, भंडारा व प्रसाद वितरण व रात्रिकाल में सतनाम भजन/सतनाम प्रवचन अथवा गुरु बाबा के जीवन पर आधारित लीला ही कराया जावे। किसी भी प्रकार से नाचा - गम्मत या सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से सतनामी संस्कृति को भ्रष्ट न किया जावे न ही अनैतिक नृत्य व गान कराया जावे। ऐसा करना पूर्णतः निंदनीय व गुरु बाबा का अपमान है।’

2 समय समय पर साहू, यादव, मरार व गोंड़ समाज के मित्रों द्वारा आपत्ति दर्ज कराया गया है कि सतनामी संतों द्वारा बाबा जी पर एकाधिकार जमाते हुए हमें बाबाजी के जयंती में आमंत्रित नही किया जाता है न जयंती कराने के सम्बन्ध में आयोजित बैठक में बुलाया जाता है और न तो जयंती कार्यक्रम कराने पर योगदान (चंदा, इत्यादि) लिया जाता। बाबा जी तो लोककल्याणकारी हैं उनकी पूजा समस्त मानव समाज के द्वारा की जाती है, इसलिए कुछ लोग बिना पूछे ही जयंती कार्यक्रम में भाग लेकर बाबा जी का पूजन करते हैं तो कुछ बाबा जी के आशीष नही ले पाते और समाज में यह भ्रांति भी फॅल रही है कि गुरू घासीदासबाबा केवल सतनामियों के गुरू है, इसलिए इस संबंध में अमल करने की जरूरत है।

इसलिए संत समाज से निवेदन है कि बाबा जी के जयंती पर कमसेकम उपरोक्त समाज को जरूर शामिल करें। बाबाजी के पूजा करने का सबको अधिकार है, न कि केवल सतनामी को। ’यदि हम नेता, मंत्री व कुछ प्रभावशाली लोगो को आमंत्रित करते हैं तो उनके समाज के सभी लोगो को क्यों नही? मनखे मनखे एक समान’

ऐसे लोगों को किसी भी शर्त में समाजिक आयोजन में माईक न दिया जावे, जो सतनामी समाज त्याग दिए हों। वे सतनामियों को भड़काकर धर्मपरिवर्तन कराने और दीगर समाज से लड़ाने का ही प्रयास करते हैं।


हुलेश्वर जोशी 
कार्यकारिणी सदस्य, 
सतनामी एवम सतनाम धर्म विकास परिषद्, 
रायपुर (छत्तीसगढ़)

सतनामी एवम सतनाम धर्म के सर्वांगीण विकास हेतु आगामी बैठकों के लिए चर्चा बिंदु - एचपी जोशी

सतनामी एवम सतनाम धर्म के सर्वांगीण विकास हेतु आगामी बैठकों के लिए चर्चा बिंदु - एचपी जोशी

सतनामी एवं सतनाम धर्म से संबंधित संगठनों के मुखिया और संत समाज से अनुरोध है कि जब भी सतनामी एवं सतनाम धर्म के विकास और उत्थान के लिए आगामी भविष्य में बैठक अथवा सम्मेलन आयोजित हो इन महत्वपूर्ण बिन्दूओं को अवश्य शामिल करें, ताकि हम अपने समाज को एक दिशा दे सकें:- 


# सतनाम धर्म की संवैधानिक मान्यता के पूर्व सामाजिक धार्मिक नियम सुनिश्चित कर लिया जावे।

# अनुसूचित जातियों के पैरा 14 से सतनामी, सूर्यवंशी और  रामनानी को पृथक कर अलग सीरियल में किया जावे।

# सतनामी समाज के लोगों को अभी भी आरक्षण की जरूरत है सतनाम धर्म की संवैधानिे मान्यता से विशेषाधिकार में कमी न हो।

# सतनामी एवम सतनाम धर्म के लिए एक सर्वमान्य ग्रंथ तैयार किया जावे, जिसमें धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, शैक्षणिक और व्यवहारगत मार्गदर्शन हो, गुरु घासीदास दास जी के सिद्धांतों के अनुरूप आदर्श आचार संहिता हो।

# समाज के 100% लोगों को उच्च शिक्षा, रोजगार एवम स्वरोजगार विकास में शामिल करने का लक्ष्य वर्ष 2025 निर्धारित की जावे।

# समाज को धार्मिक कट्टरपंथी विचारधारा के बजाय गुरु घासीदास के सिद्धांत के अनुरूप शांतिप्रिय समुदाय बनाने की कोशिश की जाए।

# समाज से हो रहे धर्म परिवर्तन की कारणों की समीक्षा हो, और इसे रोकने का प्रयास किया जावे।

# समाज का पकड़ बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय संगठन तैयार हो, जिसके माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति को जोड़ा जावे। अर्थात किसी भी प्रकार से जरूरत पड़ने पर कोई भी सूचना समाज के सभी लोगों को एक साथ एक क्लिक में दिया जा सके।

# दूसरे जाति, धर्म के मान्यताओं का निंदा किए बिना ही धर्म प्रचार का विकल्प अपनाया जावे।

# समाज का प्रत्येक नागरिक अपने मानव अधिकारों और विशेष अधिकार से परिचित हो, तथा देश के संविधान और कानून का भी जानकारी हो।

# राष्ट्र और अपने राज्य के सभी शासकीय योजनाओं की जानकारी सभी सदस्य को होनी चाहिए, इस हेतु उपयुक्त स्तर पर गठित संगठन द्वारा जागरूकता लाने का प्रयास किया जावे।

# समाज के उत्थान के लिए सामाजिक लोगों द्वारा वेब पोर्टल न्यूज चैनल तैयार किया जावे, अर्थात समाज का मीडिया में सक्रियता होनी चाहिए।

# समाज के उत्थान के लिए दबाव एवम हित समूह बनाया जावे, जो सुनिश्चित करेगा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को उसका अधिकार, अवसर और न्याय मिल रहा है।

# समाज के लोगों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के संस्थाओं से जुड़ने और राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शासकीय, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में नियोजित होने के लिए प्रेरित किया जावे।

# सतनामी समाज के अधिकांश लोग डॉक्टर, जज, वैज्ञानिक, पायलट, आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, प्रोफेसर इत्यादि बनें, ऐसी जागरूकता अभियान चलाया जावे।

# सामाजिक दंड की व्यवस्था के बजाय सामाजिक प्रोत्साहन देने पर बल दिया जावे। समाज के  प्रत्येक व्यक्ति को "सामाजिक आर्थिक सहयोग का अधिकार" होनी चाहिए।

# सामाजिक कुरीतियों पर चर्चा हो और कुरीतियों पर रोक लगाया जावे।

# सतनामी एवम सतनाम धर्म में जन्म के आधार पर महानता को त्यागा जावे, गुरु घासीदास के मूर्ति स्थापना पर रोक लगाया जावे। सामाजिक कार्यक्रमों में मांसाहार पर रोक लगाया जावे।

# सतनाम धर्म के धार्मिक महत्व वाले स्थलों के संचालन और विकास हेतु ट्रस्ट बनाया जावे। ट्रस्ट में राज्य और राष्ट्र स्तरीय प्रत्येक संगठन के एक पदाधिकारी को सदस्य बनाया जावे। निर्वाचन के माध्यम से पदाधिकारी नियुक्त हो तथा चरित्रवान व्यक्ति को ही गुरु का दायित्व सौंपा जावे।

# समाज /ट्रस्ट निर्धारित करे कि गुरु घासीदास के वंशज में से कौन कौन गुरु होगा और गुरु वंशज के अलावा समाज में किन किन संतों को गुरु का उपाधि दी जाएगी। गुरु के उपाधि, जिन्हें आगामी भविष्य में दिया जाएगा उनसे उपाधि वापस लेने का विशेषाधिकार ट्रस्ट के पास हो।

# शोध ग्रंथ का संकलन और नवीन ग्रंथों की लेखन प्रारंभ किया जावे। सतनामी एवं सतनाम धर्म के धर्मगुरू, प्रमुख नेताओं और संतो को सूचीबद्ध किया जाकर उनके बारे में शोध करने की जरूरत है।

# नवीन संशोधित ग्रंथों को ट्रस्ट द्वारा अनुमोदित किया जावे, अनुमोदित ग्रंथ की भरमार भी न हो ऐसा सुनिश्चित किया जावे।

# पूरे देश भर के सतनाम धर्म के मानने वाले लोगों को एकजूट करने का प्रयास किया जावे।

# इत्यादि ....... चर्चा बिंदु में सुधार और बिंदु जोड़ने के लिए नीचे कमेंट्स करें।


(एचपी जोशी)
अटल नगर, नवा रायपुर, छत्तीसगढ़
98261-64156

अखिल भारतीय सतनामी सम्मेलन एवं विचार संगोष्ठी का हो रहा है सफल संचालन


स्थान : गुरु तेग बहादुर भवन, रायपुर छत्तीसगढ़ 

आयोजक : सतनामी एवं सतनाम धर्म विकास परिषद 

सतनामी एवं सतनाम धर्म विकास परिषद् एवं सतनामी समाज द्वारा अखिल भारतीय स्तर पर सतनामी सम्मलेन का आयोजन गुरु तेग बहादुर भवन, (राजभवन के पास) रायपुर छत्तीसगढ़ में किया गया। यह सम्मलेन ०२ दिन तक चलेगा, जिसका आज पहला दिन सफलता पूर्वक संचालित हुआ। 

# कल दिनांक 8 सितंबर को सम्मेलन का अंतिम दिवस
# धर्मगुरू रूद्र गुरू होेगे शामिल, समाज को करेंगे संबोधित
# देश-विदेश से लगभग 500 से अधिक सतनामी संत हो रहे हैं शामिल
# आइये इस ऐतिहासिक क्षण में शामिल होने का गौरव प्राप्त करें।
# सतनाम धर्म की संवैधानिक मान्यता पर हो रही है चर्चा
# सतनामी एवं सतनाम धर्म की सर्वांगीण विकास का है लक्ष्य
# सतनामी समाज के लोगों की हो रही धर्मांतरण पर लगेगी रोक


इस सम्मलेन के पहले दिन अर्थात ७ सितम्बर २०१९ को देश विदेश में निवासरत सतनामी समाज के लगभग ५०० से अधिक संत / प्रमुख लोग शामिल हुए। सतनामी समाज द्वारा प्रायोजित सतनामी सम्मलेन का प्रमुख उद्देश्य सतनाम धर्म की संवैधानिक मान्यता को लेकर रहा है।  उल्लेखनीय है कि इस सम्मलेन में सतनामी संतों द्वारा सतनामी समाज के इतिहास, संस्कृति, मान्यता और भविष्य पर विस्तृत चर्चा की गई।  



कल दिनांक ८ सितंबर २०१९ को सम्मलेन का दूसरा और अंतिम दिन होगा, जिसमे सतनामी सामाज के धर्मगुरु रूद्र कुमार गुरु, माननीय मंत्री छत्तीसगढ़ शासन भी शामिल होंगे और सतनामी समाज को नई दिशा देने के लिए अपना सन्देश देंगे।  

सतनामी एवं सतनाम धर्म विकास परिषद् के पदाधिकारियों और सदस्यों द्वारा सतनामी संतों और समाज के प्रतिनिधियों से अनुरोध किया गया है कि वे अखिल भारतीय सतनामी सम्मेलन एवं विचार संगोष्ठी में अनिवार्यरूप शामिल होकर इस ऐतिहासिक पल की साक्षी बनें और समाज के उत्थान में अपना योगदान दें।  

उल्लेखनीय है कि सतनामी एवं सतनाम धर्म विकास परिषद सोशल मिडिया से जन्मा समिति है जो छत्तीसगढ़ शासन से पंजीकृत होकर सतनामी समाज के सर्वांगीण विकास के लिए वर्ष २०१३ से कार्यरत है। 

 

सतनामी एवं सतनाम धर्म पर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सर्वेक्षण हो रही है, सतनामी एवं सतनाम धर्म के अनुयायी आज ही सर्वेक्षण में अपना मतदान करें, मतदान के लिए नीचे लिंक में क्लिक करें ......


नेवता हे, सात और आठ सितम्बर २०१९ को रायपुर में होगा अखिल भारतीय सतनामी सम्मेलन एवं विचार संगोष्ठी का आयोजन

अखिल भारतीय सतनामी सम्मेलन एवं विचार संगोष्ठी का आयोजन 

स्थान : गुरु तेग बहादुर भवन, रायपुर छत्तीसगढ़ 

आयोजक : सतनामी एवं सतनाम धर्म विकास परिषद 

सतनामी संतों और समाज के प्रतिनिधियों से अनुरोध है कि वे अखिल भारतीय सतनामी सम्मेलन एवं विचार संगोष्ठी में अनिवार्यरूप शामिल होकर इस ऐतिहासिक पल की साक्षी बनें और समाज के उत्थान में अपना योगदान दें।  


उल्लेखनीय है कि जगतगुरु रुद्र कुमार जी (माननीय मंत्री छत्तीसगढ़ शासन) के सानिध्य में सतनामी एवं सतनाम धर्म विकास परिषद द्वारा "अखिल भारतीय सतनामी सम्मेलन एवं विचार संगोष्ठी" दिनांक : 7 एवं 8 सितम्बर 2019 को राजधानी रायपुर के गुरु तेग बहादुर भवन में आयोजित किया गया है।  


इस सम्मलेन में छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के सतनामी संत और सतनामी समाज के प्रतिनिधियों सहित दिल्ली, मध्यप्रदेश, भोपाल, महाराष्ट्र, नागपुर, उड़ीसा, असम, हरियाणा, राजस्थान, उत्तरप्रदेश, बिहार, झारखंड सहित देश विदेश में निवासरत सतनामी सामान के प्रतिनिधि और संत सम्मिलित होंगे। जिसमे नेपाल, दुबई और अमेरिका में निवासरत सतनामी संत भी शामिल होंगे। 

इस सम्मलेन का प्रमुख उद्देश्य सतनाम धर्म को संवैधानिक मान्यता दिलाने पर विचार विमर्श करना है। इसके अलावा समाज को राष्ट्रीय स्तर पर समाज को संगठित करने और समाज के आर्थिक सामाजिक उत्थान पर भी चर्चा होगी और कार्ययोजना बनाई जाएगी।  


एक सम्मलेन का आयोजन "सतनामी एवं सतनाम धर्म विकास परिषद" द्वारा किया गया है। 

उल्लेखनीय है कि "सतनामी एवं सतनाम धर्म विकास परिषद" सोशल मिडिया से जन्मा समिति है जो छत्तीसगढ़ शासन से पंजीकृत होकर सतनामी समाज के सर्वांगीण विकास के लिए वर्ष २०१३ से कार्यरत है। 

 

मानव जीवन का वास्तविक सिद्धांत क्या है ?

मानव जीवन का वास्तविक सिद्धांत क्या है ?


"मनखे-मनखे एक समान" से परिचित हुए बिना कोई भी मानव पूर्णतः मानव नही हो सकता।

"मनखे-मनखे एक समान" उन सभी कुटिल सिद्धांतों के अस्तित्व का अंतिम निदान है जो मानव को मानव से ऊंचनीच होने का कपोल कल्पित झूठा प्रमाण प्रस्तुत करने का षड्यंत्र करती है।

"मनखे-मनखे एक समान" का सिद्धांत छुआछूत, जातिवाद, ऊंचनीच, धार्मिक संघर्ष, के साथ ही झूठे धार्मिक सिद्धांतो के लिए ब्रम्हास्त्र है।

मानव जीवन का वास्तविक सिद्धांत क्या है ? इसे जानने के लिए सहस्त्रों सिद्धांतों का ज्ञान आवश्यक नही। इस संबंध में सतनाम पंथ/धर्म के पुनरसंस्थापक गुरु घासीदास बाबा के एक वाणी "मनखे-मनखे एक समान" को जान लेना पर्याप्त है।

"मनखे-मनखे एक समान" एक पंथ मात्र के लिए गुरुवाणी नही वरन, मानव समुदाय का वास्तविक सिद्धांत है। जो छुआछूत, जातिवाद, ऊंचनीच, धार्मिक संघर्ष, के साथ ही झूठे धार्मिक सिद्धांतो के लिए ब्रम्हास्त्र है।

यह गुरुवाणी उन सभी कुटिल सिद्धांतों के अस्तित्व का अंतिम निदान है जो मानव को मानव से ऊंचनीच होने का कपोल कल्पित झूठा प्रमाण प्रस्तुत करने का षड्यंत्र करती है।

"मनखे-मनखे एक समान" का सिद्धांत अर्थात "मानव-मानव एक समान" अथवा  "सभी मनुष्य समान है" को केवल एक ही पंथ/धर्म तक सीमित रखना, समस्त संसार के लिए हानिकारक है। इस सर्वोच्च सत्य को जानने का अधिकार केवल समूचे धरती में निवासरत मनुष्य ही नही वरन परग्रहियों का भी है।

विद्वानों का मानना है कि "मनखे-मनखे एक समान" से परिचित हुए बिना कोई भी मानव पूर्णतः मानव नही हो सकता।


हुलेश्वर जोशी
नया रायपुर, छत्तीसगढ़

जनहित याचिका क्या है, क्यों और कैसे दायर किया जाता है ?

जनहित याचिका क्या  है, क्यों और  कैसे  दायर  किया  जाता है ?


जनहित याचिका (PIL - Public Interest Litigation) वह याचिका है, जो कि आम नागरिकों के सामूहिक हितों की रक्षा के लिए न्यायालय में दायर की जाती है। कोई भी व्यक्ति जनहित (प्राइवेट इंट्रेस्ट लिटिगेशन) या सार्वजनिक महत्व के किसी मामले के विरूद्ध, जिसमें किसी वर्ग या समुदाय के हित या उनके मौलिक अधिकार प्रभावित हुए हों, जनहित याचिका (पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन) के जरिए न्यायालय की शरण ले सकता है।

विदित हो कि 1981 में अखिल भारतीय शोषित कर्मचारी संघ (रेलवे) बनाम यूनियन ऑफ इंडिया के केस में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस वी. आर. कृष्णाय्यर ने अपने फैसले में कहा था कि कोई गैर-रजिस्टर्ड असोसिएशन ही संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत रिट दायर कर सकता है। इसके बाद अपने एक जजमेंट में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि ‘‘आम लोगों के अधिकारों को नकारा नहीं जा सकता।’’ जिसे देखते हुए अगर कोई शख्स हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में पीआईएल दायर करना चाहे तो वह अधिवक्ता के माध्यम से अथवा लेटर लिखकर भी समस्या के बारे में सूचित कर सकता है जिसपर अदालत चाहे तो लेटर को जनहित याचिका में बदल सकती है। 

पीआईएल दो प्रकार के होते हैं, एक प्राइवेट इंट्रेस्ट लिटिगेशन और दूसरा पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन। प्राइवेट इंट्रेस्ट लिटिगेशन में पीड़ित खुद याचिका दायर करता है। इसके लिए उसे संविधान के अनुच्छेद-32 के तहत सुप्रीम कोर्ट और अनुच्छेद-226 के तहत हाई कोर्ट में याचिका दायर करने का अधिकार है। याचिकाकर्ता को अदालत को बताना होता है कि उसके मूल अधिकार का कैसे उल्लंघन हो रहा है। पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन (जनहित याचिका) दायर करने के लिए याचिकाकर्ता को यह बताना होगा कि कैसे आम लोगों के अधिकारों का हनन हो रहा है? कोई भी व्यक्ति जो सामाजिक हितों के बारे में सोच रखता हो, वह जनहित याचिका दायर कर सकता है। इसके लिये यह जरूरी नहीं कि उसका व्यक्तिगत हित भी सम्मिलित हो। 

जनहित याचिका को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 32 के अन्तर्गत उच्चतम न्यायालय के समक्ष और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 226 के अन्तर्गत उच्च न्यायालय के समक्ष दायर की जा सकती है। जनहित याचिका दायर करने के लिए यह जरूरी है, कि लोगों के सामूहिक हितों जैसे सरकार के कोई फैसले या योजना, जिसका बुरा असर लोगों पर पड़ा हो। किसी एक व्यक्ति के मौलिक अधिकारों का हनन होने पर भी जनहित याचिका दायर की जा सकती है। जनहित याचिका केन्द्र सरकार, राज्य सरकार, नगर पालिका परिषद और किसी भी सरकारी विभाग के विरूद्ध दायर की जा सकती है। ज्ञातव्य हो कि यह याचिका किसी निजी पक्ष के विरूद्ध दायर नहीं की जा सकती। लेकिन अगर किसी निजी पक्ष या कम्पनी के कारण जनहितों पर बुरा प्रभाव पड़ रहा हो, तो उस पक्ष या कम्पनी को सरकार के साथ प्रतिवादी के रूप में सम्मिलित किया जा सकता है। 


संविधान में मिले मूल अधिकार के उल्लंघन के मामले में दायर की जाने वाली याचिका में सरकार को प्रतिवादी बनाया जाता है क्योंकि मूल अधिकार की रक्षा की जिम्मेदारी सरकार की होती है। याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत सरकार को नोटिस जारी करती है और तब सुनवाई शुरू होती है।

जनहित याचिका ठीक उसी प्रकार से दायर की जाती है, जिस प्रकार से रिट (आदेश) याचिका दायर की जाती है। उच्चतम न्यायालय के समक्ष जनहित याचिका दायर करने के लिये याचिका की पाँच छाया प्रति दाखिल करनी होती हैं। जिस संबंध में प्रतिवादी को याचिका की छाया प्रति सूचना आदेश के पारित होने के बाद ही दी जाती है।

प्रश्न: क्या साधारण पत्र के जरिये भी जनहित याचिका दायर की जा सकती है?
उत्तर: हां, जनहित याचिका खत या पत्र के द्वारा भी दायर की जा सकती है। पत्र के माध्यम से जनहित याचिका दायर करने हेतु माननीय चीफ जस्टिस महोदय, सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया, तिलक मार्ग, नई दिल्ली- 110001 अथवा छत्तीसगढ़ राज्य के निवासी राज्य क्षेत्र में जनहित के लिए माननीय चीफ जस्टिस महोदय, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय, बिलासपुर को प्रकरण के संबंध में महत्वपूर्ण तथ्य एवं तथ्य के तर्क में प्रमाणित दस्तावेज की काॅपी संलग्न कर भेज सकते हैं।


प्रश्न: क्या जनहित याचिका को दायर करने व उसकी सुनवाई के लिये वकील आवश्यक है?
उत्तर: जनहित याचिका के लिये वकील होना जरूरी है परन्तु राष्ट्रीय/राज्य या जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अन्तर्गत सरकार के द्वारा वकील की सेवाएं प्राप्त कराए जाने का भी प्रावधान है।

जनहित याचिका से संबंधित उच्चतम न्यायालय के कुछ महत्वपूर्ण निर्णय:
ऽ  रूरल लिटिगेशन एण्ड इंटाइटलमेंट केन्द्र बनाम् उत्तर प्रदेश राज्य, और रामशरण बनाम भारत संघ में उच्चतम न्यायालय के कहा कि जनहित याचिकाओं की सुनवाई के दौरान न्यायालय को प्रक्रिया से संबन्धित औपचारिकताओं में नहीं पड़ना चाहिए।
ऽ  शीला बनाम भारत संघ में उच्चतम न्यायालय ने कहा कि जनहित याचिका को एक बार दायर करने के बाद वापस नहीं लिया जा सकता।

लड़ाई-झगड़े से कैसे बचा जाए?

लड़ाई-झगड़े से कैसे बचा जाए?


लड़ाई-झगड़ा किसी भी स्थिति में लाभदायक न होकर सिर्फ हानिकारक परिणाम देने वाला ही होता है इसलिए बेहतर होगा कि सभी प्रकार के विवाद से बच जाना ही श्रेष्ठ और बुद्धिमानी का कार्य है। इसलिए इन तीन टिप्स का पालन करते हुए भयंकर हानि से बचा जा सकता है।

1. बिना गलती के माफी मांग लें, सामने वाला उद्देश्यहीन हो जाएगा। आपके झुकने का तात्पर्य हारना नही वरन् सहनशील  होने का प्रमाण है।

2. चुप्पी साध लें, लम्बी लम्बी सांसें लें और भीतर ही भीतर उनके मुर्खता पर मुस्कराने का प्रयास करें, क्योंकि विवाद मुर्खता का द्योतक ही है।

3. उकसावे अथवा अनर्गल सम्बोधन को अनसुना कर दें साथ ही स्वयं को दूसरे कार्य में व्यस्त करते हुए विवाद से होने वाले हानियों पर गंभीरतापूर्वक विचार करें। संभव हो तो सामने वाले को कुछ वक्त के लिए अकेला छोड दें और आप अन्यत्र चले जाएं। 


Huleshwar Joshi
Naya Raipur, Chhattisgarh

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दुनिया अब हमारा है, सब को बताएंगे

दुनिया अब हमारा है, सब को बताएंगे
जय-जय सतनाम का परचम लहराएंगे

ये विश्व हमारा हो - कुछ ऐसा कर जाएंगे
सतनाम का अब फिर से अलख जगाएंगे

धरती आसमां ये है हमारी, सबको बताएंगे
चांद सूरज की ओर भी अब कदम बढाएंगे

सतनाम धर्म की ज्योति जलाएंगे
मनखे-मनखे एक समान ये सिद्ध कर जाएंगे

जो न समझे उन्हे अब नींद से जगाएंगे
जय-जय सतनाम का परचम लहराएंगे

हुलेश्वर जोशी सतनामी
१४-०७-२०१५

शिक्षाकर्मी बनने का सुनहरा अवसर ..........

CGTET 2017 - छत्तीसगढ़ शिक्षक पात्रता परीक्षा 2017
एग्जाम - 17/12/2017 (दो पाली में, प्राथमिक और पूर्वमध्यमिक के लिए)
आवेदन भरने की तिथि - 7/11/2017 से 27/11/2017
प्रवेश पत्र, ऑनलाइन जारी होगा - 11/12/2017
शुल्क - 1exam/2exam, General - 350/600, OBC - 250/400 and ScSt - 200/300
मित्रों ज्ञातव्य हो कि इस एग्जाम की तैयारी हेतु बाजार में बुक्स उपलब्ध है, जो साथी ऑनलाइन तैयारी करना चाहते हैं, वे यूट्यूब चैनल के माध्यम से भी CGTET 2017 के एग्जाम में सफलता हासिल कर सकते हैं।
इस संबंध में यूट्यूब चैनल Bhargava Classes, एवम अन्य कई यूट्यूब चैनल उपलब्ध हैं, जो CGTET के ऑनलाइन तैयारी में आपका सहयोग करेगा।
रोजगार एवम स्वरोजगार मार्गदर्शन हेतु मुझसे समन्वय स्थापित किया जा सकता है....

Huleshwar Joshi
Naya Raipur Chhattisgarh
http://cgvyapam.choice.gov.in/sites/default/files/002_0.pdf

UPSC CGPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कैसे करें?

UPSC CGPSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कैसे करें?


1st - 2nd Class अधिकारी बनने के इच्छुक साथी, जो अभी तक अपना तैयारी शुरू नही किये हैं तैयारी के संबंध में HP Joshi 9406003006 से संपर्क करें।


Syllabus के अनुरूप, समयसीमा तैयार करें।

UPSC/CGPSC के प्रतियोगी NCERT Class 6 -10 किताब को अधिक से अधिक, और short notes बनाकर तैयारी करें। फिर कुछ रेफरेंस बुक भी पढ़ें, बहुत सारे बुक्स का पुस्तकालय बनाने से बचें साथ ही एक ही टॉपिक या विषय को इतना न पढ़े कि आप पीएचडी कर रहे है और दूसरा छूट जाए।

नियमित रूप से 10-12Hrs पढ़ाई करें।

5 से अधिक सिरियस दोस्तों का ग्रुप बनाकर, तैयारी शुरू करें।

पिछले वर्षों के/मॉडल कम से कम 5 प्रश्नपत्र को सप्ताह में सॉल्व करें।

कम से कम 3साल पूर्व से प्री और मेंस की तैयारी साथ साथ शुरू करें, और प्री एग्जाम के 2 3 माह पहले से केवल प्री में फोकस करें।

मेंस में समय प्रबंधन, उत्तर प्रस्तुतिकरण, उत्तर की प्रामाणिकता, और प्रवाह को विशेष ध्यान देवें।

Short Notes आप अपने सुविधा के अनुसार जितना छोटा हो सके तैयार करें, उन्ही तथ्य को शामिल करें जिन्हें आप भूल जाएंगे जबकि वह परीक्षा के लिए उपयोगी है।

इंटरव्यू में सहजतापूर्ण बर्ताव करें, आपके बैकग्राउंड और करंट अफेयर्स से ही पूछे जाएंगे।

दृढनिश्चय कर लें, कि आपको अमुक पोस्ट मिलेगा ही। ओवर कॉन्फिडेंट से बचें, पोस्ट के अनुरूप अपना तैयारी करें।

जो सपना नही देख सकता और जिसका संकल्प मजबूत नही होता वह सफल हो ही नही सकता।

शिक्षा ग्रहण पहले भोजन ग्रहण नहले - माता श्यामादेवी के सिद्धांत पर अपने जीवन को अर्पित कर दें।

कुछ राष्ट्रीय समाचार the hindu इत्यादि पढ़ें।

प्रामाणिक बुक अथवा गवर्नमेंट द्वारा प्रकाशित बुक/रिपोर्ट को पढ़ने की कोशिश करें।


Huleshwar Joshi
Naya Raipur Chhattisgarh
9406003006

सीएएफ बटालियन में आरक्षक के 2800 पदों के लिए भर्ती शीघ्र

सीएएफ बटालियन में आरक्षक के 2800 पदों के लिए भर्ती शीघ्र


बेरोजगार साथी ध्यान दें : माननीय मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़ शासन डॉ रमनसिंह ने तीन महीने के भीतर 4बटालियन भर्ती कराने का घोषणा किया है। छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के चार बटालियन के लिए आरक्षक के 2800 से अधिक पदों के विरुद्ध भर्ती किया जाएगा। बेरोजगार युवाओं से अनुरोध है कि वे अपना तैयारी प्रारम्भ कर लें।

शारीरिक नाप, चिप लगाकर दौड़ कराया जाता है, छत्तीसगढ़ से 8वीं स्तर के सामान्यज्ञान पूछे जाते हैं, क्योंकि ST कैटेगरी से 8वी पास योग्यता रहता है। नौकरी लगाने के नाम पर धोखेबाजों से सावधान रहें, सट्टेबाजी के आधार पर लोग, लाखों रुपये ले लेते है। आपके योग्यता से नौकरी लग गया तो रुपये खा जाते हैं, और यदि नही लगा तो कुछ रुपये खा कर, कुछ वापस कर देते हैं। किसी भी भर्ती में अध्यक्ष, अथवा सदस्य घुस लेकर किसी व्यक्ति को नौकरी नही देते, छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल में आपकी योग्यता के आधार पर ही नौकरी लगता है।

तैयारी शुरू करें, कितना दौड़ने पर कितना अंक मिलेगा और क्या पढ़ना है इसे जानने के लिए छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के पुराने विज्ञापन को जरूर पढ़ लें। यह मान लीजिए कि लिखित और शरीरिक परीक्षा में साझे रूप से 80% से अधिक अंक प्राप्त करने पर आपकी नियुक्ति पक्की होगी। कभी कभी 65% या से अधिक पर भी लग जाता है।


श्रीमती विधि हुलेश्वर जोशी
नया रायपुर, छत्तीसगढ़

सतनाम धर्म को संवैधानिक मान्यता प्रदान करने बाबत् माननीय राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन

सतनाम धर्म को संवैधानिक मान्यता प्रदान करने बाबत् 

माननीय राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन (DRAFT)



प्रति,
माननीय भारत के राष्ट्रपति महोदय
नई दिल्ली

विषय:- ‘‘सतनाम धर्म’’ को संवैधानिक मान्यता प्रदान करने बाबत् 
द्वारा:- जिलाध्यक्ष, जिला रायपुर, छत्तीसगढ़।


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महोदय,

ज्ञातव्य हो कि छत्तीसगढ़ राज्य के गिरौदपुरी धाम, जिला रायपुर (वर्तमान बलौदाबाजार) में 18 दिसम्बर सन् 1756 को अवतरित परमपूज्यनीय गुरू घासीदास बाबा के लोक कल्याणकारी कार्यों/योगदान के फलस्वरूप तथा जाति-पाति एवं वर्ण व्यवस्था के कारण उत्पन्न भेदभाव/छुआछूत, कथित सवर्णों के लोकदमनकारी गतिविधियों, डोला उठाने की प्रथा (स्थानीय गौटिया के द्वारा नव विवाहिता को 3दिवस केलिए रखैल की भांति रखने एवं दैहिक शोषण करने) को मिटाते हुए मनखे-मनखे एक समान के संदेश देने वाले, गुरूबाबा ने अपने स्वयं के तप एवं प्रताप के बल पर सतनाम धर्म का विधिवत् स्थापना किया एवं सम्पूर्ण मानव जाति के लिए सप्त सिद्धांत/सात मार्ग बताये। जो इसप्रकार है:-
1.सतनाम पर विश्वांस करना।
2.जीव हत्या नही करना। 
3.मांशाहार नही करना।
4.चोरी एवं जुआ से दूर रहना।
5.नशा सेवन नही करना।
6.जाति-पाति, उंच-नीच के प्रपंच में नही पडना।
7.पराय स्त्री को माता-बहन मानना।
(इस संबंध में आपके संज्ञान में यह बात लाया जाना आवश्यक है कि सतनाम धर्म में मूर्तिपुजा निषेध है, ब्राम्हण की पूजा एवं ब्रम्हणों से पूजा नही कराया जाता है।)

परमपूज्यनीय गुरू घासीदास बाबा के प्रभाव से नारलौल से आये (सन् 1672 में औरंगजेब के अत्याचारके खिलाफ सतनामी विद्रोह में पराजित सतनामी संत विशेषतः छत्तीसगढ़ में आ बसे) सतनामी संतो के साथ ही छत्तीसगढ़ के लगभग सभी जाति (ब्राम्हण, राजपूत, बनिया, मरार, तेली, यादव, कुर्मी, गोंड, इत्यादि), बौद्ध व हिन्दू धर्म एवं जो बौद्ध एवं हिन्दू धर्म को ग्रहण नही किये थे ऐसे लोग भी सतनाम धर्म को आत्मसात् कर सतनामी बने। वर्तमान परिवेश में परमपूज्यनीय गुरू घासीदास बाबा के 1 करोड से अधिक अनुयायी हैं, जो आपसे सतनाम धर्म की संवैधानिक मान्यता की आपेक्षा रखते हैं। ज्ञातव्य हो कि गुरू बाबा के जन्मस्थली गिरौदपुरी धाम में सतनामी, सतनाम धर्म एवं सत्य के प्रतीक भव्य जैतखाम का निर्माण छत्तीसगढ़ शासन द्वारा कराया गया है, जिसकी उंचाई कुतुबमीनार से उंचा है।

छत्तीसगढ़ की सामाजिक व्यवस्था में वर्तमान में एक नवीन पहल की शुरूआत हुई हैं, जिसके बारे में आपको जानकर अत्यंत पीडा होगी। क्योंकि कतिपय हिन्दू संस्थाओं एवं लोगों द्वारा आयोजित निजी/सार्वजनिक कार्यक्रम में दो पृथक-पृथक भोज का व्यवस्था किया जाता है। एक में हिन्दू के सभी जाति के लोग और दूसरे भोज में केवल सतनामी जाति के लोग। छत्तीसगढ़ में सतनामी के लिए अलग मोहल्ला होता है किसी भी धार्मिक/सामाजिक एवं राजनैतिक योगदान के लिए सतनामी समाज के लोगों के लिए सतनामी संबोधन से संबोधित किया जाता है, जबकि शेष के लिए हिन्दू संबोधन होते हैं। ब्रिटीश काल की बात कहें तो सतनामी समाज की मांग के आधार पर अंगे्रज सरकार ने दिनांक 07/10/1926 को आदेश पारित किया और सतनामी जाति के लोगों को केवल सतनामी से संबोधित करने का आदेश प्रसारित किया। षडयन्त्र के कारण सतनामी समाज तीन भाग/जाति (सतनामी, सूर्यवंशी सतनामी एवं रामनामी सतनामी) में बंट गये जिसके कारण आदिनांक तक सतनाम धर्म की संवैधानिक मान्यता के लिए उचित प्रयास संभव नही हो पाया है। सतनामी समाज के लोग अत्यंत स्वाभिमानी होते हैं, जिसके कारण किसी भी मानव को जाति-पाति के आधार पर उंचनीच नही मानते, जबकि मौजूदा हिन्दू धर्म ऐसे ही भावनाओं, रूढीवादी परम्पराओं, छुआ-छूत एवं उंच-नीच के भावनाओं से प्रेरित है। जिसके कारण सतनामी, स्वयं को हिन्दू कहलाने में असहज महसूस करते है और हिन्दू संबोधन का निंदा करते हैं।

हिन्दू धर्म से पृथक सतनाम धर्म की संवैधानिक मान्यता मांगने का दूसरा बडा कारण अत्यंत दूर्भाग्यजनक है, जिसका आपको संबोधित करते हुए बयान करना अनुचित होगा। इस संबंध में आपको अपने पीडा से अवगत कराते हुए केवल यही याचना करना चाहते हैं कि हम सतनामी समाज के लोग, दलित, शोशित, शुद्र अथवा नीच जाति के लोग कहलाना नही चाहते ऐसे संबोधन से हमारी धार्मिक आस्था चोटिल होती है और हमारा हृदय दर्द से कराह उठता है।

अतएव हम सतनामी समाज की ओर से एतद्द्वारा हिन्दू धर्म से पृथक सतनाम धर्म की संवैधानिक मान्यता हेतु आपसे आग्रह करते हैं।

स्थान - रायपुर, छत्तीसगढ़
दिनांक 19/09/2017

Guru GhasiDas Baba (Image)







(हुलेश्वर जोशी सतनामी)
कार्यकारिणी सदस्य,
सतनामी एवं सतनाम धर्म
विकास परिषद, छत्तीसगढ़, रायपुर




प्रतिलिपि: कृपया आवश्यक कार्यवाही/सूचनार्थ/अवलोकनार्थ।
1.माननीय प्रधानमंत्री महोदय, भारत सरकार, नई दिल्ली।
2.माननीय राज्यपाल महोदय, छत्तीसगढ़ शासन, रायपुर।
3.माननीय विधानसभा अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ विधानसभा, रायपुर।
4.सतनामी एवं सतनाम धर्म के सभी अनुयायी की ओर: शोशल मिडीया के माध्यम से कृपया आवश्यक संशोधन हेतु प्रेषित है।