सतनाम संकल्प वाक्य/शपथ प्रारूप - सतनाम धर्म

शुक्रवार, 20 दिसंबर 2019

सतनाम संकल्प वाक्य/शपथ प्रारूप

सतनाम संकल्प वाक्य/शपथ प्रारूप
गुरु घासीदास जयंती एवं समस्त प्रकार के समाजिक धार्मिक आयोजनों के अवसर पर सतनामी समाज द्वारा लिए जाने वाले 07 संकल्प
(यह संकल्प अभी फाईलन नही हुआ है, इसे बेहतर बनाने के लिए आपसे निवेदन है कि सुधार हेतु अपना सुझाव एचपी जोशी-9826164156 को दें।)
यदि आप सतनामी एवं सतनाम धर्म के अनुयायी हैं तो एकबार इस संकल्प वाक्य को जरूर पढें, अच्छा लगेगा। 
1- मैं (हुलेश्वर जोशी आत्मज श्री शैलकुमार जोशी), गुरु घासीदास को साक्षी मानकर संकल्प लेता/लेती हूं कि ‘‘मैं गुरु घासीदास के बताए मार्ग पर चलूंगा/चलूंगी। मैं सतनाम को अपने हृदय में स्थापित करूंगा/करूंगी। मैं मूर्तिपूजा और मनखे-मनखे से भेद नहीं करूंगा/करूंगी। मैं परस्त्री को माता-बहन मानूंगा/मै परपुरूश को पिता के समान, भाई अथवा पूत्र मानूंगी। मैं सदैव शाकाहार ग्रहण करूंगा/करूंगी। मैं किसी भी शर्त में जीव हत्या, मांशाहार और नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करूंगा/करूंगी।’’
2- मैं, सतनाम को साक्षी मानकर संकल्प लेता/लेती हूं कि ‘‘मैं ब्रम्हाण्ड में विद्यमान ज्ञात अज्ञात तत्वों के प्रति आदर का भाव रखूंगा/रखूंगी। मैं जल का संरक्षण करूंगा/करूंगी और वायु को स्वस्छ रखनें में अपना योगदान दूंगा/दूंगी। मैं वृक्षारोपण और पर्यावरण की रक्षा करूंगा/करूंगी। मैं सतनाम धर्म के मूल सिद्धांतों और मान्यताओं का प्रचार/प्रसार करते हुए मानव समाज को प्रेरित करूंगा/करूंगी।’’ 
3- मैं, सतनाम धर्म को साक्षी मानकर संकल्प लेता/लेती हूं कि ‘‘मैं सतनाम धर्म संस्कृति के अनुरूप जीवन का चुनाव करूंगा/करूंगी। मैं स्वयं जीवन पर्यंत शिक्षा ग्रहण का प्रयास करूंगा/करूंगी और अपने आने वाली पीढ़ी को उच्च शिक्षा दिलाउंगा/दिलाउंगी उन्हें स्वरोजगार और रोजगार का अवसर दूंगा/दूंगी।’’
4- मैं, गुरु अमरदास को साक्षी मानकर संकल्प लेता/लेती हूं कि ‘‘मैं आध्यात्म और आत्मचिंतन के मार्ग को अपनाउंगा/अपनाउंगी किसी भी शर्त में दूसरे के बहकावे में नहीं आउंगा/आउंगी। मैं नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत को अपने धर्म और चरित्र का हिस्सा मानूंगा/मानूंगी।’’
5- मैं, गुरु बालकदास को साक्षी मानकर संकल्प लेता/लेती हूं कि ‘‘मैं अपने गरिमा को सदैव बढ़ाने का प्रयास करूंगा/करूंगी। मैं अपने परिवार और समाज के कल्याण के लिए गुरू बालकदास की भांति समर्पित रहूंगा/रहूंगी और परोपकार करूंगा/करूंगी।’’
6- मैं, अपने जीवन अर्थात् आत्मा और शरीर को साक्षी मानकर संकल्प लेता/लेती हूं कि ‘‘मैं सदैव अपने चित्त में धर्म के मूल तत्वों जैसे न्याय, समानता, प्रेम, भाईचारा, दया, करूणा, अहिंसा और सम्मान को धारण करूंगा/करूंगी और इसके अनुकूल कार्य करूंगा/करूंगी। मैं सदैव स्वस्थ रहने का यत्न करूंगा/करूंगी।’’
7- मैं संविधान को साक्षी मानकर संकल्प लेता/लेती हूं कि ‘‘मैं अपने मौलिक अधिकार और मानव अधिकार की रक्षा के लिए समस्त प्रकार से तत्पर रहूंगा/रहूंगी। मैं दूसरे व्यक्ति के मौलिक अधिकार और मानव अधिकार का अतिक्रमण नहीं करूंगा/करूंगी। मै अपने राष्ट्र और राज्य में लागू विधि को जानने का प्रयास करूंगा/करूंगी तथा अपने मौलिक कर्तव्य और विधि का पालन करूंगा/करूंगी। मैं किसी भी षर्त में संविधान विरोधी कार्य नहीं करूंगा/करूंगी। मैं संविधान द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों से छेडखानी/का अतिक्रमण को बर्दास्त नही करूंगा/करूंगी।’’ 

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हम भारत के नागरिकों के लिए भारत का संविधान समस्त विश्व के सारे धार्मिक पुस्तकों से अधिक पूज्यनीय और नित्य पठनीय है। यह हमारे लिए किसी भी ईश्वर से अधिक शक्ति देने वाला धर्मग्रंथ है - हुलेश्वर जोशी

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एतद्द्वारा सतनामी समाज के लोगों से अनुरोध है कि किसी भी व्यक्ति अथवा संगठन के झांसे में आकर धर्म परिवर्तन न करें, समनामी एवं सतनाम धर्म के लोगों के सर्वांगीण विकास के लिए सतनामी समाज का प्रत्येक सदस्य हमारे लिए अमूल्य हैं।

एतद्द्वारा सतनामी समाज से अपील है कि वे सतनाम धर्म की संवैधानिक मान्यता एवं अनुसूचित जाति के पैरा-14 से अलग कर सतनामी, सूर्यवंशी एवं रामनामी को अलग सिरियल नंबर में रखने हेतु शासन स्तर पर पत्राचार करें।