Satnam Dharm (सतनाम धर्म)

शुक्रवार, 1 मई 2020

सतनामी समाज का महासदस्यता अभियान (शीघ्र लें सदस्यता) - SSDVP


सतनामी समाज में वैचारिक क्रांति लाने के लिए सोशल मीडिया से जन्मा यह "सतनामी एवम सतनाम धर्म विकास परिषद" वर्ष 2013 में छत्तीसगढ़ सरकार से पंजीकृत हुआ उसके बाद से समाज मे सतनामियत को गौरवशाली बनाने का अभियान शुरू हुआ। इस परिषद का कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण छत्तीसगढ़ राज्य है, इसका पंजीयन क्रमांक छग राज्य 4965/2013 है।

समाज के सर्वांगीण विकास और कुरीतिरहित होने में हर व्यक्ति का बराबर का हिस्सेदारी होता है। इसका श्रेय कोई अकेला नही ले सकता इसलिए आप भी आगे आईए अपने हिस्से का कर्तव्य निभाईए - HP Joshi 

सदस्यता शूल्क 


सोशल मीडिया साइट्स ही नहीं बल्कि जमीनी स्तर में जाकर भी परिषद काम करता आ रहा है। परिषद के प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार है:-
1- "सतनाम धर्म" की संवैधानिक मान्यता।
2- जाति "सतनामी" को अनुसूचित जातियों के पैरा 14 से अलग करवाना।
3- सतनामी समाज के लोगों को जागरूक करते हुए धार्मिक पलायन से रोकना।
4- सामाजिक सद्भावना को बनाए रखना।
5- देश में उचित प्रतिनिधित्व के लिए सतनामी समाज को तैयार करना; अर्थात सामाजिक, आर्थिक, शैक्षणिक और राजनैतिक दृष्टिकोण में विकास करना तथा राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय सरकार और संस्था के प्रमुख पदों के योग्य बनाने के लिए उचित स्कील हेतु प्रेरित करना।
6- सामाजिक धार्मिक कुरीतियों को समाप्त करना।
7- पूरे विश्व मे गुरु घासीदास बाबा के मानने वालों को एकजुट करना।

जो सतनामी संत, माता और बहन इन उद्देश्यों के प्राप्ति में हमारे साथ शामिल होना चाहते हैं वे "सतनामी एवं सतनाम धर्म विकास परिषद" छत्तीसगढ़ रायपुर में शामिल हो सकते हैं। समाज और धर्म के लिए काम करने का सुनहरा अवसर आज ही सदस्यता ग्रहण करने के लिए हमारे साथियों से सम्पर्क करें।

संपर्क करें ..
1- श्री विष्णु बंजारे सतनामी, संस्थापक (99936-55620)
2- श्री उत्तम बंजारे सतनामी, प्रदेश अध्यक्ष (70240-36542)
3- श्री फिरोज कोशले सतनामी, प्रदेश उपाध्यक्ष (97540-06077)
4 - श्री नरेंद्र चेलक सतनामी, महासचिव (99932-65857)
5- श्री राजेश्वर आदिल सतनामी, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष (99814-42910)
6- श्री पीड़ी दिवाकर सतनामी, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष (76973-42565)
7- श्री कुंदन आडिल सतनामी, प्रदेश कोषाध्यक्ष (98065-12507)
8- श्री कुणाल सतनामी, प्रदेश सचिव (62631-67612)
10- हेल्पलाइन नंबर 98065-12507
11- जिला स्तरीय अध्यक्ष















सोमवार, 9 मार्च 2020

सतनामी संस्कृति के खिलाफ है होलिका दहन - गुरु घासीदास के जीवन दर्शन पर आधारित लेख

सतनामी संस्कृति के खिलाफ है होलिका दहन - गुरु घासीदास के जीवन दर्शन पर आधारित 

गुरु घासीदास बाबा जी ने कहा है कि नारी का सम्मान करो, पराय स्त्री को माता और बहन मानों। गुरु घासीदास बाबा जी ने कहा है कि जीव हत्या और हिंसा मत करो, हिंसा को बढ़ावा मत दो, मांसाहार मत करो, मदिरा का सेवन मत करो।

इसके बावजूद हम उत्सव के नाम हम हरे भरे पेड़ काटकर पर्यावरण को प्रदूषित कर रहे हैं तो यह अनुचित और गुरु घासीदास बाबा जी के जीवन दर्शन के प्रतिकूल है। हमारा मानव संस्कृति सदैव से प्रकृति और कृषि पर निर्भर रहा है इसलिए गर्मी के दिनों में होने वाले आगजनी से बचने के लिए हमारे पूर्वजों ने जलाना शुरू किया था। नारी का मतलब माता, बहन, बेटी और बहु जिसे गुरु घासीदास बाबा जी ने माता या बहन मानने का सलाह दिया है। एक नारी हमारी माता, बहन, बेटी, बहू या पत्नी है जिनके बिना श्रृष्टि नहीं चल सकती, जिनके बिना हमारा जन्म और जीवन दोनों ही संभव नहीं है। उसी स्त्री को जिसे नारायणी माना जाता है, उसी नारी को जिसे देवी कहा जाता है, उस नारी को जिसे भगवती कहा जाता है यदि हम पुतला दहन करते है तो हमारे लिए छत्तीसगढ़ी का वह कहावत "जेन थाली म खाए ओहि म छेद करे" या "खाए पतरी म छेद करईया" फिट बैठता है।

यदि उत्सव के नाम पर, अपने पेट भरने के लिए हम पशु पक्षियों के हत्या को प्रोत्साहित करें या स्वयं हत्या करें तो यह गलत है क्योंकि उस पशु पक्षी का भी तो अपना परिवार होता है। जब तक भोजन के लिए हमारे पास बेहतर विकल्प है हम पशु पक्षी का हत्या क्यों करें? विशेषकर तब जब हमारे गुरु घासीदास बाबा जी ने जीव हत्या और मांसाहार नहीं करने का सलाह दिया है। मदिरा पान से हमारा मानसिक संतुलन खो जाता है, मदिरा पान से होने वाले फिजूल खर्च हमारे बेहतर जीवन निर्वहन के प्रत्याशा को प्रभावित करता है इसीलिए गुरु घासीदास बाबा जी ने मदिरा पान करने से मना किया है इसके बावजूद हम मदिरा पान करें तो क्या हम गुरु घासीदास बाबा जी के अनुयाई होने का अधिकार रखते हैं?

होली त्योहार के नाम पर हममें से अधिकांश लोग (१) फूहड़ता करेंगे, (२) नारी का अपमान करेंगे, (३) पशु पक्षी का हत्या करेंगे, (४) मांसाहार करेंगे, (५) मदिरापान करेंगे, (६) संभव है लड़ाई झगड़ा करेंगे अर्थात हिंसा करेंगे, और (७) समाज में आपसी रिश्तों को खराब करेंगे। इसके बावजूद यदि आपको ऐसा लगता है कि होली रंगों का त्योहार है तो जरूर मनाएं, इसके बावजूद आपको लगता है कि होलिका बुरी औरत थी जिन्होंने भक्त प्रहलाद को जलाने का प्रयास किया था तो होलिका दहन जरूर करें, मगर अपने भी गिरेबान को झांककर देखो क्या आप कभी किसी के लिए दुर्भावना नहीं रखते? क्या आप कभी जीव हत्या नहीं किए? क्या आप कभी भ्रूण हत्या के पक्षधर नहीं रहे? कहानी के अनुसार होलिका को उसके किए की सजा मिल गई, मगर अपने भीतर के होलिका का क्या? जो रोज किसी व्यक्ति के हत्या का विचार रखता है, कभी भी पशु पक्षी का हत्या करके या करवाके उसे भोजन बना लेता है।

आपसे अनुरोध है इसके बावजूद यदि आपको होलिका दहन करना है तो निःसंदेह करें, केवल इतना ख्याल रखना होलिका के नाम पर जीवित वृक्ष को कभी मत काटना इसके बजाय सूखे घांस फुस और पुराने अनुपयोगी फर्नीचर अथवा छत्तीसगढ़ राज्य के माननीय मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा प्रस्तुत विकल्प गोबर से बने कंडे अथवा गोबर से बने लकड़ी को जलाना ही जलाना।

नोट:
यह लेख गुरु घासीदास बाबा जी के जीवन दर्शन पर आधारित है। लेखक का उद्देश्य किसी व्यक्ति अथवा समाज के आस्था को आघात पहुंचाने का नहीं है, फिर भी लेखक पूर्व क्षमा प्रार्थी है।

बुधवार, 4 मार्च 2020

धर्म से जुडी कुछ उपयोगी बातें, जिसे प्रत्येक मनुष्य को जानना चाहिए - नवीन दर्शन पर आधारित लेख

धर्म से जुडी कुछ उपयोगी बातें, जिसे प्रत्येक मनुष्य को जानना चाहिए - नवीन दर्शन पर आधारित लेख
HP Joshi
हमें धर्म से जुडी उपयोगी बातें जानने के पहले धर्म से संबंधित कुछ परिभाषाओं का अध्ययन कर लेना चाहिए, ताकि धर्म को समझने में हमें आसानी हो।

धर्म क्या है ?
मूलतः धर्म जीवन जीने का तरीका मात्र है, धर्म एक मार्गदर्शी सिद्धांत है जो अपने अनुयायियों को अच्छे और उत्कृष्ट जीवन के लिए मार्ग प्रशस्त करता है। धर्म के माध्यम से संस्थापक का संदेश होता है कि धर्म के फलां-फलां लक्ष्य है, जीवन का फलां-फलां उद्देश्य है और अनुयायियों का इस मार्गदर्शी सिद्धांत के अनुरूप जीवन जीना उचित होगा - माता श्यामा देवी

यदि धर्म महान सिद्धांत हैं और अच्छे जीवन जीने का कला है तब दो धर्म के बीच संघर्ष के क्या कारण हैं?
निःसंदेह धर्म जीवन जीने का बेहतर तरीका है परन्तु पिछले सैकडों वर्षों से एक परम्परा बन गई है कि धार्मिक सिद्धांत, धार्मिक पुस्तकों और धर्मग्रंथ के नाम पर कोई भी अदार्शनिक व्यक्ति एक विवादित लेख, विचार अथवा पुस्तक के माध्यम से स्वयं को स्थापित कर लेता है जिसके परिणामस्वरूप धर्म का मार्ग परिवर्तित होकर अपनी मूल भावना से भटक जाती है। यही कुटिलता दो अलग-अलग धर्म के बीच खुनी संघर्ष का कारण बनता जाता है - श्री हुलेश्वर जोशी 

अनेकोनेक धर्म बनने के क्या कारण हैं?
मौजूदा धर्म के सिद्धांत से अलग विचारधारा रखने वाले सम्प्रभुत्व संपन्न धार्मिक अथवा दार्शनिक नेताओं द्वारा मौजूदा धर्म से श्रेष्ठ और अच्छे जीवन दर्शन की कल्पना करना ही धर्म के उत्पत्ति का कारण है। 

तो क्या मौजूदा धर्म के बाद स्थापित धर्म उससे अधिक अच्छी जीवन दर्शन प्रस्तुत करती होगी?
निःसंदेह, होना तो यही चाहिए। परन्तु यह उनके अनुयायियों के उपर भी निर्भर करता है कि वे कब तक अपने धार्मिक सिद्धांत के अनुरूप चल सकते हैं? कितना जल्दी वे पुरानी अनुपयोगी परम्पराओं को समाप्त कर देते हैं और कितने जल्दी नवीन वैज्ञानिक सोच को स्वीकार कर लेते हैं।

मौजूदा धर्म में सबसे श्रेष्ठ जीवन दर्शन किस धर्म में विद्यमान है?
यह अत्यंत सरल प्रश्न हैं परन्तु इसका उत्तर कहीं उससे अधिक कठीन है। मेरा ही नही वरन् अधिकांश धर्मनिरपेक्ष बुद्धजीवियों का मानना है कि कोई भी धर्म आपस में महान अथवा उंच या निम्न कोटि का नही होता है। यह उनके अनुयायियों का एक कल्पना मात्र है कि उसका धर्म महान है और दिगर धर्म उससे कम अथवा महान नही है। यदि मैं अपना स्पष्ट मत ब्यक्त करना चाहूंगा तो सायद इसका परिणाम अच्छे न आएं इसलिए आपसे अनुरोध करना चाहूंगा कि आप अपने लिए किसी एक मौजूदा धर्म को ही न अपनाएं, बल्कि मानव-मानव एक समान के सिद्धांत के अनुरूप जीवन जीयें। आपके सामने जिस किसी धर्म के अच्छे सिद्धांत आते हों उन्हें अपने आचरण में शामिल करें और अनुपयोगी या मानवता विरोधी सिद्धांत से परे ही रहें।

किसी एक धर्म को मानना या धर्म निरपेक्ष होने में अच्छा क्या होगा?
आपका यह प्रश्न बहुत अच्छा है, मै इसका सटिक जवाब भी दे सकता हूं मगर समस्या यह है कि संभवतः आप मेरे विचार से सहमत न हों, इसलिए अपके सामने कुछ तर्क प्रस्तुत करना चाहूगां- 
1- कोई भी मनष्य उंच अथवा नीच नही होता सभी बराबर हैं।
2- किसी भी स्थिति में हिंसा को प्रोत्साहन देने वाले सिद्धांत अच्छे नही हो सकते।
3- वर्ग संघर्ष को बढ़ावा देने वाले विचारधारा को किसी भी स्थिति में उचित नही मानना चाहिए।
4- अनुपयोगी परम्पराओं को त्याग देना ही बुद्धिमत्ता है।
5- क्या आपके धार्मिक सिद्धांत आपको प्रश्न करने का अधिकार देता है?

श्री हुलेश्वर जोशी के दर्शन एवं विचार पर आधारित, श्री जोशी शिक्षा शास्त्र में स्नातकोत्तर डिग्री प्राप्त कर चूके हैं और इग्नू में मानव अधिकार में कोर्स कर रहे हैं।

शुक्रवार, 28 फ़रवरी 2020

गिरौदपुरी मेला - गुरु घासीदास बाबा के जन्मस्थली 28 फरवरी से 1 मार्च 2020

Giroudpuri Dham - Guru Darshan Mela
परम पूज्य गुरु घासीदास बाबा जी के अवतार स्थली, तपोभूमि गिरौदपुरी धाम मे प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी "सतनामी एवं सतनाम धर्म विकास परिषद" का सतनाम धर्म संस्कृति के प्रचार प्रसार एवं गिरौदपुरी धाम मे पधारे संत समाज को सेवा प्रदान करने हेतु "सेवा शिविर" लगाया है !

मेला दिनांक 28 -29 फरवरी और 01 मार्च 2020 को आयोजित किया गया है।

सतनामी एवम सतनाम धर्म के अनुयायियों से अनुरोध है मेला में पधारकर गुरु दर्शन का लाभ लें।


सतनामी एवम सतनाम धर्म विकास परिषद

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गिरौदपुरी दर्शन में जाने वाले सतनामी संत हमारे परिषद के निम्नांकित सतनामी सपुतों से सम्पर्क कर सकते हैं:-

  1. श्री कुनाल सतनामी - 62631-67612
  2. श्री मनीष सतनामी - 91111-19638
  3. श्री पुनम सतनामी - 90091-88987

शुक्रवार, 20 दिसंबर 2019

सतनाम संकल्प वाक्य/शपथ प्रारूप

सतनाम संकल्प वाक्य/शपथ प्रारूप
गुरु घासीदास जयंती एवं समस्त प्रकार के समाजिक धार्मिक आयोजनों के अवसर पर सतनामी समाज द्वारा लिए जाने वाले 07 संकल्प
(यह संकल्प अभी फाईलन नही हुआ है, इसे बेहतर बनाने के लिए आपसे निवेदन है कि सुधार हेतु अपना सुझाव एचपी जोशी-9826164156 को दें।)
यदि आप सतनामी एवं सतनाम धर्म के अनुयायी हैं तो एकबार इस संकल्प वाक्य को जरूर पढें, अच्छा लगेगा। 
1- मैं (हुलेश्वर जोशी आत्मज श्री शैलकुमार जोशी), गुरु घासीदास को साक्षी मानकर संकल्प लेता/लेती हूं कि ‘‘मैं गुरु घासीदास के बताए मार्ग पर चलूंगा/चलूंगी। मैं सतनाम को अपने हृदय में स्थापित करूंगा/करूंगी। मैं मूर्तिपूजा और मनखे-मनखे से भेद नहीं करूंगा/करूंगी। मैं परस्त्री को माता-बहन मानूंगा/मै परपुरूश को पिता के समान, भाई अथवा पूत्र मानूंगी। मैं सदैव शाकाहार ग्रहण करूंगा/करूंगी। मैं किसी भी शर्त में जीव हत्या, मांशाहार और नशीले पदार्थों का सेवन नहीं करूंगा/करूंगी।’’
2- मैं, सतनाम को साक्षी मानकर संकल्प लेता/लेती हूं कि ‘‘मैं ब्रम्हाण्ड में विद्यमान ज्ञात अज्ञात तत्वों के प्रति आदर का भाव रखूंगा/रखूंगी। मैं जल का संरक्षण करूंगा/करूंगी और वायु को स्वस्छ रखनें में अपना योगदान दूंगा/दूंगी। मैं वृक्षारोपण और पर्यावरण की रक्षा करूंगा/करूंगी। मैं सतनाम धर्म के मूल सिद्धांतों और मान्यताओं का प्रचार/प्रसार करते हुए मानव समाज को प्रेरित करूंगा/करूंगी।’’ 
3- मैं, सतनाम धर्म को साक्षी मानकर संकल्प लेता/लेती हूं कि ‘‘मैं सतनाम धर्म संस्कृति के अनुरूप जीवन का चुनाव करूंगा/करूंगी। मैं स्वयं जीवन पर्यंत शिक्षा ग्रहण का प्रयास करूंगा/करूंगी और अपने आने वाली पीढ़ी को उच्च शिक्षा दिलाउंगा/दिलाउंगी उन्हें स्वरोजगार और रोजगार का अवसर दूंगा/दूंगी।’’
4- मैं, गुरु अमरदास को साक्षी मानकर संकल्प लेता/लेती हूं कि ‘‘मैं आध्यात्म और आत्मचिंतन के मार्ग को अपनाउंगा/अपनाउंगी किसी भी शर्त में दूसरे के बहकावे में नहीं आउंगा/आउंगी। मैं नैसर्गिक न्याय के सिद्धांत को अपने धर्म और चरित्र का हिस्सा मानूंगा/मानूंगी।’’
5- मैं, गुरु बालकदास को साक्षी मानकर संकल्प लेता/लेती हूं कि ‘‘मैं अपने गरिमा को सदैव बढ़ाने का प्रयास करूंगा/करूंगी। मैं अपने परिवार और समाज के कल्याण के लिए गुरू बालकदास की भांति समर्पित रहूंगा/रहूंगी और परोपकार करूंगा/करूंगी।’’
6- मैं, अपने जीवन अर्थात् आत्मा और शरीर को साक्षी मानकर संकल्प लेता/लेती हूं कि ‘‘मैं सदैव अपने चित्त में धर्म के मूल तत्वों जैसे न्याय, समानता, प्रेम, भाईचारा, दया, करूणा, अहिंसा और सम्मान को धारण करूंगा/करूंगी और इसके अनुकूल कार्य करूंगा/करूंगी। मैं सदैव स्वस्थ रहने का यत्न करूंगा/करूंगी।’’
7- मैं संविधान को साक्षी मानकर संकल्प लेता/लेती हूं कि ‘‘मैं अपने मौलिक अधिकार और मानव अधिकार की रक्षा के लिए समस्त प्रकार से तत्पर रहूंगा/रहूंगी। मैं दूसरे व्यक्ति के मौलिक अधिकार और मानव अधिकार का अतिक्रमण नहीं करूंगा/करूंगी। मै अपने राष्ट्र और राज्य में लागू विधि को जानने का प्रयास करूंगा/करूंगी तथा अपने मौलिक कर्तव्य और विधि का पालन करूंगा/करूंगी। मैं किसी भी षर्त में संविधान विरोधी कार्य नहीं करूंगा/करूंगी। मैं संविधान द्वारा प्रदत्त मूल अधिकारों से छेडखानी/का अतिक्रमण को बर्दास्त नही करूंगा/करूंगी।’’ 

गुरुवार, 12 दिसंबर 2019

सतनाम धर्मशाला गिरौदपुरी का लोकार्पण, दिनांक 11.12.2019


सतनाम धर्मशाला गिरौदपुरी, यह धर्मशाला छत्तीसगढ़ प्रगतिशील सतनामी समाज द्वारा केवल समाजिक सहयोग से करीब 2.5 करोड़ की लागत से निर्मित है, जिसका उद्घाटन श्री भूपेश बघेल जी, माननीय मुख्यमंत्री द्वारा दिनांक 11.12.2019 को उद्घाटन किया गया है।

एतद्द्वारा सतनामी समाज छत्तीसगढ़ प्रगतिशील सतनामी समाज के पदाधिकारियों एवं सतनाम धर्मशाला के निर्माण हेतु सहयोग करने वाले दानदाताओं को बधाई देता है। राज्य के समस्त पंजीकृत संस्थाओं से अपील है कि अपने अपने स्तर पर समाज के उत्थान और कल्याण के लिए ऐसे ही कार्य करें।

आशा है कि शीघ्र ही गिरौदपुरी में सतनाम विश्वविद्यालयसतनाम यूपीएससी/सीजीपीएससी कोचिंग, आवासीय हाॅस्टल और सतनाम बाल संस्कार केन्द्र स्थापित हो सकेगा। 

शुक्रवार, 6 दिसंबर 2019

"नवा रायपुर सतनामी समाज" मनाएगा गुरु घासीदास बाबा जी की जयंती

"नवा रायपुर सतनामी समाज" मनाएगा गुरु घासीदास बाबा जी की जयंती

नवा रायपुर सतनामी समाज प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी गुरु घासीदास बाबा जी की जयंती मनाएगा। उल्लेखनीय है कि इस वर्ष से सेक्टर 27 के स्थान पर अब सेक्टर 29 में जयंती मनाया जाएगा। 

कल दिनांक 07/12/2019 को भी बैठक आयोजित की जाएगी, जिसमें स्थाई कार्यकारिणी गठित किया जाना  प्रस्तावित है। जिसके लिए नवा रायपुर में निवासरत समस्त सतनामी समाज सादर आमंत्रित हैं।

नवा रायपुर में निवासरत सतनामी संतों से अपील है कि वे बैठक में शामिल हों और नवा रायपुर सतनामी समाज की निःशुल्क सदस्यता प्राप्त करें।

सदस्यता प्राप्त करने के लिए मोबाइल नंबर 98261-64156 में अपना नाम, पता एवम वॉट्सएप नंबर लिखकर वॉट्सएप करें।

बुधवार, 27 नवंबर 2019

गुरू घासीदास जयंति कैसे मनाएं ?

गुरू घासीदास जयंति कैसे मनाएं ?

दूनिया का सबसे सर्वोच्च ज्ञान ’’मनखे-मनखे एक समान’’ का संदेश देने वाले परमपुज्यनीय गुरू घासीदास बाबा जी का जन्म 18 दिसम्बर सन् 1756 में ग्राम गिरौदपुरी, जिला रायपुर (वर्तमान जिला बलौदाबाजार) में हुआ था। उनके संदेशों एवं जनजागरूकता का ही परिणाम है कि आज मानव समुदाय यह स्वीकारने लगा है कि सभी मनुष्य एक समान हैं, कोई उच्च अथवा कोई नीच नही है, उनके जनआंदोलनों के प्रभाव से ही आज देश का बडा वर्ग शोषित होने से बच पाया है। गुरू घासीदास के जन्म के पूर्व मानव-मानव के बीच केवल असमानता, शोषण और अत्याचार जैसे ही संबंध थे।


गुरू घासीदास के जन्मदिवस को देशवासी गुरू घासीदास जयंति के रूप में बनाते हैं। हम संत समाज से आग्रह करते है कि संत समाज इस आयोजन में बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले। संतों ज्ञातव्य हो कि गुरू घासीदास की जयंती प्रत्येक वर्ष 18 दिसम्बर से प्रायः 31 दिसम्बर तक लगातार ही मनाया जाता है। कतिपय मामलों में इसके बाद भी लोग अपने आस्था के अनुरूप जयंति मनाते रहते है। इस संबंध में कुछ विशेष सुझाव मैं संत समाज शेयर करना चाहता हूँ:-

समाज द्वारा आयोजित जयंती कार्यक्रम में क्रमशः पदयात्रा, चैकपूजा, ध्वजारोहण, पंथी नृत्य, भंडारा व प्रसाद वितरण व रात्रिकाल में सतनाम भजन/सतनाम प्रवचन अथवा गुरु बाबा के जीवन पर आधारित लीला ही कराया जावे। किसी भी प्रकार से नाचा - गम्मत या सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से सतनामी संस्कृति को भ्रष्ट न किया जावे न ही अनैतिक नृत्य व गान कराया जावे। ऐसा करना पूर्णतः निंदनीय व गुरु बाबा का अपमान है।’

2 समय समय पर साहू, यादव, मरार व गोंड़ समाज के मित्रों द्वारा आपत्ति दर्ज कराया गया है कि सतनामी संतों द्वारा बाबा जी पर एकाधिकार जमाते हुए हमें बाबाजी के जयंती में आमंत्रित नही किया जाता है न जयंती कराने के सम्बन्ध में आयोजित बैठक में बुलाया जाता है और न तो जयंती कार्यक्रम कराने पर योगदान (चंदा, इत्यादि) लिया जाता। बाबा जी तो लोककल्याणकारी हैं उनकी पूजा समस्त मानव समाज के द्वारा की जाती है, इसलिए कुछ लोग बिना पूछे ही जयंती कार्यक्रम में भाग लेकर बाबा जी का पूजन करते हैं तो कुछ बाबा जी के आशीष नही ले पाते और समाज में यह भ्रांति भी फॅल रही है कि गुरू घासीदासबाबा केवल सतनामियों के गुरू है, इसलिए इस संबंध में अमल करने की जरूरत है।

इसलिए संत समाज से निवेदन है कि बाबा जी के जयंती पर कमसेकम उपरोक्त समाज को जरूर शामिल करें। बाबाजी के पूजा करने का सबको अधिकार है, न कि केवल सतनामी को। ’यदि हम नेता, मंत्री व कुछ प्रभावशाली लोगो को आमंत्रित करते हैं तो उनके समाज के सभी लोगो को क्यों नही? मनखे मनखे एक समान’

ऐसे लोगों को किसी भी शर्त में समाजिक आयोजन में माईक न दिया जावे, जो सतनामी समाज त्याग दिए हों। वे सतनामियों को भड़काकर धर्मपरिवर्तन कराने और दीगर समाज से लड़ाने का ही प्रयास करते हैं।


हुलेश्वर जोशी 
कार्यकारिणी सदस्य, 
सतनामी एवम सतनाम धर्म विकास परिषद्, 
रायपुर (छत्तीसगढ़)

शुक्रवार, 18 अक्तूबर 2019

सतनामी एवम सतनाम धर्म के सर्वांगीण विकास हेतु आगामी बैठकों के लिए चर्चा बिंदु - एचपी जोशी

सतनामी एवम सतनाम धर्म के सर्वांगीण विकास हेतु आगामी बैठकों के लिए चर्चा बिंदु - एचपी जोशी

सतनामी एवं सतनाम धर्म से संबंधित संगठनों के मुखिया और संत समाज से अनुरोध है कि जब भी सतनामी एवं सतनाम धर्म के विकास और उत्थान के लिए आगामी भविष्य में बैठक अथवा सम्मेलन आयोजित हो इन महत्वपूर्ण बिन्दूओं को अवश्य शामिल करें, ताकि हम अपने समाज को एक दिशा दे सकें:- 


# सतनाम धर्म की संवैधानिक मान्यता के पूर्व सामाजिक धार्मिक नियम सुनिश्चित कर लिया जावे।

# अनुसूचित जातियों के पैरा 14 से सतनामी, सूर्यवंशी और  रामनानी को पृथक कर अलग सीरियल में किया जावे।

# सतनामी समाज के लोगों को अभी भी आरक्षण की जरूरत है सतनाम धर्म की संवैधानिे मान्यता से विशेषाधिकार में कमी न हो।

# सतनामी एवम सतनाम धर्म के लिए एक सर्वमान्य ग्रंथ तैयार किया जावे, जिसमें धार्मिक, सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक, शैक्षणिक और व्यवहारगत मार्गदर्शन हो, गुरु घासीदास दास जी के सिद्धांतों के अनुरूप आदर्श आचार संहिता हो।

# समाज के 100% लोगों को उच्च शिक्षा, रोजगार एवम स्वरोजगार विकास में शामिल करने का लक्ष्य वर्ष 2025 निर्धारित की जावे।

# समाज को धार्मिक कट्टरपंथी विचारधारा के बजाय गुरु घासीदास के सिद्धांत के अनुरूप शांतिप्रिय समुदाय बनाने की कोशिश की जाए।

# समाज से हो रहे धर्म परिवर्तन की कारणों की समीक्षा हो, और इसे रोकने का प्रयास किया जावे।

# समाज का पकड़ बनाने के लिए अंतरराष्ट्रीय, राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय संगठन तैयार हो, जिसके माध्यम से समाज के अंतिम व्यक्ति को जोड़ा जावे। अर्थात किसी भी प्रकार से जरूरत पड़ने पर कोई भी सूचना समाज के सभी लोगों को एक साथ एक क्लिक में दिया जा सके।

# दूसरे जाति, धर्म के मान्यताओं का निंदा किए बिना ही धर्म प्रचार का विकल्प अपनाया जावे।

# समाज का प्रत्येक नागरिक अपने मानव अधिकारों और विशेष अधिकार से परिचित हो, तथा देश के संविधान और कानून का भी जानकारी हो।

# राष्ट्र और अपने राज्य के सभी शासकीय योजनाओं की जानकारी सभी सदस्य को होनी चाहिए, इस हेतु उपयुक्त स्तर पर गठित संगठन द्वारा जागरूकता लाने का प्रयास किया जावे।

# समाज के उत्थान के लिए सामाजिक लोगों द्वारा वेब पोर्टल न्यूज चैनल तैयार किया जावे, अर्थात समाज का मीडिया में सक्रियता होनी चाहिए।

# समाज के उत्थान के लिए दबाव एवम हित समूह बनाया जावे, जो सुनिश्चित करेगा कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को उसका अधिकार, अवसर और न्याय मिल रहा है।

# समाज के लोगों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के संस्थाओं से जुड़ने और राज्य, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के शासकीय, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में नियोजित होने के लिए प्रेरित किया जावे।

# सतनामी समाज के अधिकांश लोग डॉक्टर, जज, वैज्ञानिक, पायलट, आईएएस, आईपीएस, आईएफएस, प्रोफेसर इत्यादि बनें, ऐसी जागरूकता अभियान चलाया जावे।

# सामाजिक दंड की व्यवस्था के बजाय सामाजिक प्रोत्साहन देने पर बल दिया जावे। समाज के  प्रत्येक व्यक्ति को "सामाजिक आर्थिक सहयोग का अधिकार" होनी चाहिए।

# सामाजिक कुरीतियों पर चर्चा हो और कुरीतियों पर रोक लगाया जावे।

# सतनामी एवम सतनाम धर्म में जन्म के आधार पर महानता को त्यागा जावे, गुरु घासीदास के मूर्ति स्थापना पर रोक लगाया जावे। सामाजिक कार्यक्रमों में मांसाहार पर रोक लगाया जावे।

# सतनाम धर्म के धार्मिक महत्व वाले स्थलों के संचालन और विकास हेतु ट्रस्ट बनाया जावे। ट्रस्ट में राज्य और राष्ट्र स्तरीय प्रत्येक संगठन के एक पदाधिकारी को सदस्य बनाया जावे। निर्वाचन के माध्यम से पदाधिकारी नियुक्त हो तथा चरित्रवान व्यक्ति को ही गुरु का दायित्व सौंपा जावे।

# समाज /ट्रस्ट निर्धारित करे कि गुरु घासीदास के वंशज में से कौन कौन गुरु होगा और गुरु वंशज के अलावा समाज में किन किन संतों को गुरु का उपाधि दी जाएगी। गुरु के उपाधि, जिन्हें आगामी भविष्य में दिया जाएगा उनसे उपाधि वापस लेने का विशेषाधिकार ट्रस्ट के पास हो।

# शोध ग्रंथ का संकलन और नवीन ग्रंथों की लेखन प्रारंभ किया जावे। सतनामी एवं सतनाम धर्म के धर्मगुरू, प्रमुख नेताओं और संतो को सूचीबद्ध किया जाकर उनके बारे में शोध करने की जरूरत है।

# नवीन संशोधित ग्रंथों को ट्रस्ट द्वारा अनुमोदित किया जावे, अनुमोदित ग्रंथ की भरमार भी न हो ऐसा सुनिश्चित किया जावे।

# पूरे देश भर के सतनाम धर्म के मानने वाले लोगों को एकजूट करने का प्रयास किया जावे।

# इत्यादि ....... चर्चा बिंदु में सुधार और बिंदु जोड़ने के लिए नीचे कमेंट्स करें।


(एचपी जोशी)
अटल नगर, नवा रायपुर, छत्तीसगढ़
98261-64156

शनिवार, 7 सितंबर 2019

अखिल भारतीय सतनामी सम्मेलन एवं विचार संगोष्ठी का हो रहा है सफल संचालन


स्थान : गुरु तेग बहादुर भवन, रायपुर छत्तीसगढ़ 

आयोजक : सतनामी एवं सतनाम धर्म विकास परिषद 

सतनामी एवं सतनाम धर्म विकास परिषद् एवं सतनामी समाज द्वारा अखिल भारतीय स्तर पर सतनामी सम्मलेन का आयोजन गुरु तेग बहादुर भवन, (राजभवन के पास) रायपुर छत्तीसगढ़ में किया गया। यह सम्मलेन ०२ दिन तक चलेगा, जिसका आज पहला दिन सफलता पूर्वक संचालित हुआ। 

# कल दिनांक 8 सितंबर को सम्मेलन का अंतिम दिवस
# धर्मगुरू रूद्र गुरू होेगे शामिल, समाज को करेंगे संबोधित
# देश-विदेश से लगभग 500 से अधिक सतनामी संत हो रहे हैं शामिल
# आइये इस ऐतिहासिक क्षण में शामिल होने का गौरव प्राप्त करें।
# सतनाम धर्म की संवैधानिक मान्यता पर हो रही है चर्चा
# सतनामी एवं सतनाम धर्म की सर्वांगीण विकास का है लक्ष्य
# सतनामी समाज के लोगों की हो रही धर्मांतरण पर लगेगी रोक


इस सम्मलेन के पहले दिन अर्थात ७ सितम्बर २०१९ को देश विदेश में निवासरत सतनामी समाज के लगभग ५०० से अधिक संत / प्रमुख लोग शामिल हुए। सतनामी समाज द्वारा प्रायोजित सतनामी सम्मलेन का प्रमुख उद्देश्य सतनाम धर्म की संवैधानिक मान्यता को लेकर रहा है।  उल्लेखनीय है कि इस सम्मलेन में सतनामी संतों द्वारा सतनामी समाज के इतिहास, संस्कृति, मान्यता और भविष्य पर विस्तृत चर्चा की गई।  



कल दिनांक ८ सितंबर २०१९ को सम्मलेन का दूसरा और अंतिम दिन होगा, जिसमे सतनामी सामाज के धर्मगुरु रूद्र कुमार गुरु, माननीय मंत्री छत्तीसगढ़ शासन भी शामिल होंगे और सतनामी समाज को नई दिशा देने के लिए अपना सन्देश देंगे।  

सतनामी एवं सतनाम धर्म विकास परिषद् के पदाधिकारियों और सदस्यों द्वारा सतनामी संतों और समाज के प्रतिनिधियों से अनुरोध किया गया है कि वे अखिल भारतीय सतनामी सम्मेलन एवं विचार संगोष्ठी में अनिवार्यरूप शामिल होकर इस ऐतिहासिक पल की साक्षी बनें और समाज के उत्थान में अपना योगदान दें।  

उल्लेखनीय है कि सतनामी एवं सतनाम धर्म विकास परिषद सोशल मिडिया से जन्मा समिति है जो छत्तीसगढ़ शासन से पंजीकृत होकर सतनामी समाज के सर्वांगीण विकास के लिए वर्ष २०१३ से कार्यरत है। 

 
हम भारत के नागरिकों के लिए भारत का संविधान समस्त विश्व के सारे धार्मिक पुस्तकों से अधिक पूज्यनीय और नित्य पठनीय है। यह हमारे लिए किसी भी ईश्वर से अधिक शक्ति देने वाला धर्मग्रंथ है - हुलेश्वर जोशी

निःशूल्क वेबसाईड - सतनामी एवं सतनाम धर्म का कोई भी व्यक्ति अपने स्वयं का वेबसाईड तैयार करवाना चाहता हो तो उसका वेबसाईड निःशूल्क तैयार किया जाएगा।

एतद्द्वारा सतनामी समाज के लोगों से अनुरोध है कि किसी भी व्यक्ति अथवा संगठन के झांसे में आकर धर्म परिवर्तन न करें, समनामी एवं सतनाम धर्म के लोगों के सर्वांगीण विकास के लिए सतनामी समाज का प्रत्येक सदस्य हमारे लिए अमूल्य हैं।

एतद्द्वारा सतनामी समाज से अपील है कि वे सतनाम धर्म की संवैधानिक मान्यता एवं अनुसूचित जाति के पैरा-14 से अलग कर सतनामी, सूर्यवंशी एवं रामनामी को अलग सिरियल नंबर में रखने हेतु शासन स्तर पर पत्राचार करें।