कलजुग के पहिचान

// कलजुग के पहिचान //

देख तो संगी रे, कईसे कलजुग ह बउरावत हे
भरे चउमास म देख-आमा हमउरे लहलहावत हे
गलीके कारी कुतिया घलो बारो मास बियावत हे
देख तो संगी रे, कईसे कलजुग ह बउरावत हे

माता घलो कुमाता बनके, कोख म बेटी ल उजारत हे
सुन्दरता के पाला पडके, डब्बा के दूध पियावत हे
बीयर बार म धुमे खतिर, आया के सुखादुध धरावत हे
देख तो संगी रे, कईसे कलजुग ह बउरावत हे

नवा नेवरनिन पानी नई देय, सास-ससुर करलावत हे
सास बिचारी ल सुंवासा तियागे के बारा उदिम सुझावत हे
बाह रे शहरिया-कलजुगी डउकी, मेडुआ बनाके किंदारत हे
देख तो संगी रे, कईसे कलजुग ह बउरावत हे

बेटा ल देख तो संगी काबर, अपन धरम ल तियागत हे
दाई-ददा बर दवई नईये, संगवारीन ल दारू म नहवावत हे
डउकी बर चिरहा पोलिका, लईका ल नगरा घुमावत हे
देख तो संगी रे, कईसे कलजुग ह बउरावत हे

नियाव के गोठ ल भुल जा संगी, गरीबहा दुबर गोहरावत हे
जेकर लाठी तेकरे बईला, पउआ-भर दारू म, नियाव ह बेकावत हे
बलतकार करईया ठीठोली करथे, गरीबिन बेटी ल देखव, पंखा म फहरावत हे
देख तो संगी रे, कईसे कलजुग ह बउरावत हे

रोमांस करत हे बडका गरूजी, चपरासी ह परहावत हे
इसकुल के इसपेलिंग नई जानंय तेन पिरिंसपल कहावत हे
किसान के इनटेलीजेन्ट बेटा, त त त अर्रर चिल्लावत हे
देख तो संगी रे, कईसे कलजुग ह बउरावत हे

देख तो संगी रे, कईसे कलजुग ह बउरावत हे
भरे चउमास म देख-आमा हमउरे लहलहावत हे
गलीके कारी कुतिया घलो बारो मास बियावत हे
देख तो संगी रे, कईसे कलजुग ह बउरावत हे

रचना- आचार्य हुलेश्वर जोशी
(20 सितम्बर 2014)

सतनाम धर्मशाला गिरौदपुरी

सतनाम धर्मशाला गिरौदपुरी
सतनाम धर्मशाला गिरौदपुरी, यह धर्मशाला छत्तीसगढ़ प्रगतिशील सतनामी समाज द्वारा केवल समाजिक सहयोग से करीब 2.5 करोड़ की लागत से निर्मित है, जिसका उद्घाटन श्री भूपेश बघेल जी, माननीय मुख्यमंत्री द्वारा दिनांक 11.12.2019 को उद्घाटन किया गया है।