महतारी अउ बहिनी बर पाती

// महतारी अउ बहिनी बर पाती //

        सतनाम धरम के मनईया जम्मों दाई अउ बहिनी मन ले चरण स्पर्स करत, हुलेश्वर जोशी के बिनती हवय कि आप अइसन बेटा बेटी ल जनम देवव जेन ह सतनाम धरम के परम्परा ल आगु बढाये खातिर संत रूप म भंवसागर ल तार देवय, दुनिया भर म सतनाम धरम ल किर्ति परदान करा सकंय l आपन ले बिनती हवय आप अपन कोख के जनम देय अंश ल शाकाहार, परोपकार, दयावान अउ धरमवान बनाये के जतन करव जेकर ले विश्व के महान संतजनों के सतनाम धर्म को पुनस्थापित करे म आपके योगदान मिल सकय l अपन अंश ल सत्यकरम करे खातिर परेरित करव, सतनाम धरम के संस्थापक परमपुज्यनीय गुरूघासी दास के बताये रस्दा म चले के ताकत अउ परेरना देवव l आपन अपन देवीय ताकत ल जानव कि आप अपन गरभ के भीतरी म, कोख म अपने जइसे मनखे ल गढ सकथव त ऐहु बात त गांठ धरके बांध लव आपन अपन गरभ के भितरीम ओकर जिनगी के रस्दा धलो निरधारित कर सकत हव अउ ओकर जीनगी के आवसियकता ल निरधारित करके ओकर अंतस म गियान ल पिरो सकत हव अउ ओला ताकत दे सकत हव l हे दाई बहिनी होव मोर बखाने आपन के उक्त गुण ह सांकेतिक आए असली ताकत ल आपन सुवयम ही जानसकत हव अउ दुसर आदिपुरूष सतनाम l

        सतनाम धरम के अनुयायी होए खातिर आपन के करतबिय होतहे कि आप सतनामी समाज ल एक जिम्मेदार अउ सच्चा मनखे/अंश परदान करव l आपके आशिष ले जनम लेवईया अंश ह केवल अउ केवल आपके ही इक्च्छानुसार करतबिय करही, आपके पुन्यपरताप के अनुसार ही आपके अंश के भविशय ह निरधारित होही l एकरे सेती ले मय ह बार-बार आपन के बिनती करत हंव कि आप सतनाम धरम के हित ल धियान धरके ही अपन अंश के निरमान करव l

एक इसतिरी के जीवन कब सुफल होथे :- इसतिरी जनम के सुफलता के समबंध म माता श्यामा देवी अउ सतनाम धरम के संतसमाज ले जेन गियान मिले हवय ओकर अनुसार मय ह आपन ले इसतिरी जनम के सुफलता के बिषय म जानकारी दिये के परयास करत हंव :: एक इसतिरी के जीनगी तबे सुफल होथे जब वो अपन अंश के रूप म बेटी नईते बेटा ल जनम देथे, अंश के निरमान बिना एक इसतिरी के जीनगी बियरथ खईता हो जाथे l जब माता के रूप म कुमाता नई बनय अउ कुपुतर नईते कुपुतरी बने ले अपन अंश ल बचा लेथे, मतलब ओकर अंश ह धरम के रस्दा म चलथे, तबे एक इसतिरी के जीनगी ह सुफल होथे l
        परतेय महतारीन ले मोर बिनती हवय कि ओ अपन अंश ल सही रस्दा देखावय अउ धरम के मारग म चलावय l जेन महतारी के अंश ह सत के मारग ल अपन धरम जान लेथे अउ ओकरेच अनुरूप करम करथे, अइसन बेटा/बेटी के महतारी बर अमरलोक म एक उत्तम पद निरधारित हो जोथे l

नारी बर नवा रसदा :- संत समाज म प्रचलित प्रथा के अनुसार नारी जीवन के मरम ल बताये के सुअवसर ह मोर बर बड भागिय के बिसे आए, नारी जीनगी म करना चाही अउ का नई करना चाहि ए बिसे ह महतपुरन आए जेला मय निचे लिखत हंव –
1. परतेक नारी देवी के स्वरूप आए, नारी के सनमान देवी जस करे जाए चाहि नारी ह महतारी, बहिनी, बेटी, बहु या परइसतिही के रूप म होय  l
2. नारी जीवन म उत्तम इसथान पति के होथे, ओकर बाद सास-ससुर : माता-पिता : धर्मगुरू /आदि पुरूष : अंश : देवर-ननद : कुल के समस्त सदस्य : समाज : सतनाम धर्म के समस्त अनुयायी और भवसागर के जम्मो जीवन धारी परानी l जबकि विवाहपूर्व माता-पिता के इसथान उत्तम होथे l
3. परतेक नारी ल शाकाहारी होना चाही अउ सतनाम धरम के बारे म समपुरन गियान होना चाही, जेकर ले सुवयम अउ अपन अंश ल धरम के पुरन गियान दे सकय l
4. परतेक इसतिरी ल (विधवा माता/बहन ल छोडके) सदैव सिंगार करना चाही अउ पति के प्रति निसठा रखना चाही l
5. परतेक नारी ल सदा ही धरम रक्षा अनुरूप अंश को जनम देना चाही अउ अपन अंश ल धरमवान बनाये के नियति करना चाही l
6. पति अउ सास-ससुर के सेवा सदा ही करना चाही l
7. सतनाम धरम अउ परमपुज्यनीय गुरूघासीदास के बताये रसदा म चलत अपन जीनगी के जम्मो करम ल करना चाही l 

        महतारी अउ बहिनी मन बर लिखे पतिया के पठन-पाठन करे ले महतारीन अउ बहिनी के जीनगी अमर हो जाही l

आचार्य हुलेश्वर जोशी
ग्राम- मनकी, पोस्ट साल्हेघोरी,
तहसील- लोरमी, जिला-मुंगेली (छग)