अमरलोक के रसदा - सतनाम धर्म

सोमवार, 22 सितंबर 2014

अमरलोक के रसदा

अमरलोक के रसदा

        सतनाम धरम के मान्यतानुसार परमपुज्यनीय गुरूघासीदास बाबाजी के बताये गियान के अनुरूप सत के रस्दा म चलईया अउ असत्य/झूठ/सोसन के खिलाफ संघर्स करईया मनखे सदा ही अमरलोक जाथे l सत्य के मारग म चलईया संत/माता ल सदैव ही आदिपुरूष सतनाम के आसीस मिलथे अउ अमरलोक जायेके समय सतपुरूष के विमान म बईठे के सुअवसर घलो मिलथे l सतनाम धर्म के मान्यतानुसार जउन मनखे के गुरू नई होवय, जेन मनखे ल गुरू के गियान नई मिलय अउ जेन मनखे ह गुरूके बताये गियान के अनुरूप सतमार्ग म नई चलय अइसन मनखे ल अमरलोक जायेके सुभाग नई मिलय l अमरता पाये खातिर जम्मो मनखे ल गुरू बनाना चाही, सतनाम धर्म के सिदधान्त के पालन करना चाही अउ सतपुरूष के संदेश के अनुरूप जीनव व्यतित करना चाही l

आचार्य हुलेश्वर जोशी
ग्राम- मनकी, पोस्ट साल्हेघोरी,
तहसील- लोरमी, जिला-मुंगेली (छग)

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हम भारत के नागरिकों के लिए भारत का संविधान समस्त विश्व के सारे धार्मिक पुस्तकों से अधिक पूज्यनीय और नित्य पठनीय है। यह हमारे लिए किसी भी ईश्वर से अधिक शक्ति देने वाला धर्मग्रंथ है - हुलेश्वर जोशी

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एतद्द्वारा सतनामी समाज के लोगों से अनुरोध है कि किसी भी व्यक्ति अथवा संगठन के झांसे में आकर धर्म परिवर्तन न करें, समनामी एवं सतनाम धर्म के लोगों के सर्वांगीण विकास के लिए सतनामी समाज का प्रत्येक सदस्य हमारे लिए अमूल्य हैं।

एतद्द्वारा सतनामी समाज से अपील है कि वे सतनाम धर्म की संवैधानिक मान्यता एवं अनुसूचित जाति के पैरा-14 से अलग कर सतनामी, सूर्यवंशी एवं रामनामी को अलग सिरियल नंबर में रखने हेतु शासन स्तर पर पत्राचार करें।